Sunday, April 15, 2012

Infertility

Infertility की समस्या पहले से अधिक बढी है . इसके कारण हो सकते हैं ; तनाव , सब्जी, फलों में कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों का होना , शारीरिक श्रम का अभाव और fast food इत्यादि .
                    कारण कोई भी हो , अगर कपालभाति प्राणायाम नियमित रूप से किया जाए तो इन सभी कारणों का प्रभाव भी बहुत कम होगा और infertility की समस्या भी शायद नहीं होगी .
                                  महिलाओं में infertility का एक कारण poly cystic ovary हो सकता है . अगर F S H और L H  हारमोन का असंतुलन हो तो poly cystic ovary की समस्या हो सकती है . इसके कारण periods भी असंतुलित होते हैं . या तो अधिक होते हैं या बहुत कम या फिर होने ही बंद हो जाते हैं . इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है ; प्रतिदिन कपालभाति प्राणायाम करें .
                             दशमूल क्वाथ के एक चम्मच को एक गिलास पानी में धीमी आंच पर पकाकर , जब वह आधा रह जाए तब पी लें . यह काढ़ा कुछ समय सुबह शाम लेते रहने से periods नियंत्रित हो जाते हैं . कपालभाति प्राणायाम के साथ यह काढ़ा भी लेते रहने से pregnancy की सम्भावना बहुत अधिक बढ़ जाती है .
                                     अगर eggs कम बन रहे हों तो शिवलिंगी और पुत्र जीवक के बीजों का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें . यह पावडर एक एक ग्राम की मात्रा में सुबह शाम लेने से बहुत जल्द ही pregnancy हो जाती है .
                                      पुरुषों को sperm count कम होने की समस्या हो तो यौवनामृत वटी , चन्द्र प्रभावटी और शिलाजीत रसायन की एक एक गोली लेते रहें और प्राणायाम करते रहें .
              अश्वगंधा , शतावर , सफ़ेद मूसली और कौंच के बीज ;  ये सब मिलाकर लेने से भी  sperm count बढ़ते हैं .

दूध कम होने पर .........

अगर नवजात शिशु के लिए दूध कम पड़ता है और बच्चा भूखा रह जाता है, तो माता शतावर का चूर्ण 1-2 ग्राम सवेरे शाम दूध के साथ ले ले . इससे पूरा दूध आना प्रारम्भ हो जाता है . कुछ और जड़ी बूटियाँ भी इसमें सहायक हैं :
~ रुद्रवंती    रुद्रवन्ती + शतावर +अश्वगंधा मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सवेरे शाम लेने से लाभ होता है ।
~ कदम्ब     कदम्ब के फल का पावडर और शतावर का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर लें ।
~ करेला      करेले की सब्जी रोज खाने से दूध भी पूरा आता है और माता को arthritis भी होने की सम्भावना से मुक्ति मिलती है ।
~ पिप्पली     2 ग्राम शतावर और 1 ग्राम पिप्पली का पावडर नियमित रूप से लेने से दूध भी खूब आता है और बच्चा भी हृष्ट पुष्ट होता है ।नवप्रसूता माताएं तीन ग्राम शतावर +एक ग्राम पिप्पली का पावडर दूध बढ़ाने के लिए सुबह शाम ले सकती हैं . इससे शरीर भी जल्द  ही सामान्य स्थिति में आ जाएगा .
~  शीशम        शीशम के पत्तों को पीसकर उसकी लुगदी स्तन पर कुछ घंटे लगाने से दूध अधिक आना शुरू हो जाता है ।  पशुओं के थनों में थनैला रोग भी इसके पत्तों की लुगदी लगाने से समाप्त हो जाता है। 
~  मुलेठी          मुलेठी और शतावर का पावडर,  दूध में पकाकर लेने से दूध खूब आता है और बच्चा भी तंदुरुस्त होता है । केवल मुलेठी के पावडर को दूध में पकाकर लेने से भी फायदा होता है ।  माताओं को दूध कम है तो इसकी जड़ के पावडर के साथ शतावर का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर सवेरे शाम एक एक चम्मच दूध के साथ लें । पशुओं का पेट ठीक रखना है या दूध बढ़ाना है तो उनके चारे में इसका पावडर 100 ग्राम मिला दें . पशु दूध तो अधिक मात्रा में देते ही हैं ; साथ ही उनका दूध भी औषधीय गुणयुक्त भी हो जाता है । 

~  सेमल (silk cotton tree )  ;  अगर माताओं को दूध कम आता हो तो इसकी जड़ की छाल का पावडर लें ।  स्तन में शिथिलता हो तो  इसके काँटो पर बनने वाली गांठों को घिसकर लगायें । 

          पशुओं का भी अगर दूध कम आए या थनैला नाम का रोग हो जाए तो उन्हें 50-60 ग्राम शतावर की जड़ का पावडर दिया जा सकता है । इससे रोग भी ठीक होगा और दूध भी अधिक आएगा । अगर शीशम के पत्तों की लुगदी को पशुओं के थनों पर लगाकर 7-8 घंटे के लिए छोड़ दिया जाए , तो थनैला रोग तो ठीक होता ही है दूध की मात्रा भी बढ़ जाती है ।
100 ग्राम मुलेठी की जड़  पशुओं को चारे के साथ खिला दी जाए तो उनके पेट की बीमारियाँ खत्म होती हैं और उनका दूध बहुत बढ़ जाता है । इस दूध को पीने से इंसानों की बीमारियाँ भी ठीक हो जाती हैं ।

Saturday, April 14, 2012

उल्टी, दस्त (vomiting and diarrhoea)

उल्टियाँ और दस्त होने पर पानी में नमक और चीनी डालकर इसका घोल लें .  मुक्ताशुक्ती भस्म 10 ग्राम +शंख भस्म 10 ग्राम +मोती पिष्टी 5 ग्राम ;   इन तीनों का पावडर मिलाकर रख लें .
                            अगर दो से तीन महीने के बच्चे को उल्टी दस्त हैं तो एक चावल के दाने के बराबर यह  पावडर बच्चे को दें . अगर थोड़ा बड़ा बच्चा है तो मूंग के दाने के बराबर , और भी अधिक बड़ा है तो चने के बराबर मात्रा में यह चूर्ण दें . अगर बड़ा व्यक्ति है तो आधा ग्राम की मात्रा में यह पावडर ले सकता है . इससे उल्टियों और दस्तों में तुरंत आराम आता है .

Thursday, April 12, 2012

Hernia

             प्रारम्भिक अवस्था की हर्निया की बीमारी में कपड़ा या बेल्ट बांधकर धीरे धीरे प्राणायाम करें . धीरे धीरे प्राणायाम करनेसे हर्निया में लाभ होता है . बाह्य प्राणायाम  सबसे अधिक लाभदायक होता है . पूरा श्वास बाहर निकालकर कुछ क्षण  पेट को ऐसे ही रखें . फिर धीरे धीरे श्वास अन्दर लें .  पीछे झुकने वाले आसन न करें . अमरुद के 4-5 पत्ते +युक्लिप्ट्स के 4-5 पत्ते +आम के 4-5 पत्ते ; इन सभी को मिलाकर, कूटकर, इनका काढ़ा पीयें . इससे आँतों की झिल्ली मजबूत हो जाती है . 
                                  कांचनार गुग्ग्लु या वृद्धि बाधिका वटी और सर्वक्ल्प क्वाथ आदि का प्रयोग किया जा सकता है . लेकिन ज्यादा हर्निया बढने पर आपरेशन ही करना पड़ता है .

Monday, April 9, 2012

नींद की समस्या (insomnia )

                                              अनुलोम विलोम प्राणायाम निरंतर नियमपूर्वक किया जाए तो यह समस्या आ ही नहीं सकती और अगर यह समस्या आ भी गई है तो ठीक हो जाती है . Ring finger के top पर थोडा दबा लें . शारीरिक श्रम अवश्य करें .
                                                   सर्पगंधा 50 ग्राम +जटामासी100 ग्राम +ब्राह्मी 50 ग्राम ; इन सबको मिलाकर रात को 1 -2  ग्राम पानी के साथ ले लें . इससे एलोपेथी की दवाओं से छुटकारा मिल जाएगा . बहुत छोटे बच्चे को यह समस्या है तो बादाम रोगन की माथे पर और सिर में मालिश कर दें . बहुत अधिक समस्या है तो बच्चे को केवल जटामासी ही थोड़ी मात्रा में  दे दें .
                  सिर्फ  मेधावटी  की दो दो गोली सवेरे शाम लेने से भी नींद की समस्या हल हो जाती है . बच्चे एक एक गोली सवेरे शाम ले सकते हैं. .  
                             पिप्पली को भूनकर उसके पावर का नस्य लेने से भी नींद ठीक आती है । सोते समय 1=2 ग्राम पिप्पली के पावडर को दूध के साथ लेने से भी नींद की समस्या से मुक्ति मिलती है ।
\            5 ग्राम भाँग के पावडर में 1-2 ग्राम सर्पगंधा का पावडर मिलाकर रात को सोते समय कुछ दिन लिया जाए तो नींद ठीक आने लगती है । सहदेवी के पौधे को शयन कक्ष में रखने से या इसके सूखे पौधे को तकिए के नीचे रखकर सोने से भी नींद अच्छी आती है ।       
              बहुत अधिक नींद आती हो तो सौंफ का पानी लेते रहने से नींद ठीक हो जाती है .

Sunday, April 8, 2012

मोतियाबिंद (cataract)

आँखों की बीमारियाँ बहुत गंभीर समस्या हैं . ग्लूकोमा और मोतियाबिंद से तो बहुत परेशानी होती है .
                 कपालभाति प्राणायाम निरंतर रूप से करते रहने से मोतियाबिंद की समस्या को स्वयम ही समाप्त होते देखा गया है .
                    सप्तामृत लौह 20 ग्राम +आम्लिकी रसायन 200 ग्राम +मुक्ताशुक्ति 20 ग्राम +मोतीपिष्टि 2-4 ग्राम  ;  इन सबको मिलाकर एक एक चम्मच सवेरे शाम लेने से बहुत लाभ होता है .
                                                              आंवले का जूस , आंवले का पावडर , आंवले का मुरब्बा और गर्मियों में अमृत रसायन ;  ये सभी आँखों के लिए बहुत लाभदायक हैं . Retinal Pigmentosa और रतौंधी जैसी बीमारियाँ भी इससे ठीक होती हैं .
                    हथेली में  तर्जनी और मध्यमा अँगुलियों के नीचे वाले स्थान पर acupressure करें . यह आँख का point होता है .
                   सवेरे नित्यकर्म से निवृत्त होकर मुंह में ताज़ा पानी भरकर आँखों में खूब छींटे मारें और मुंह का पानी बाहर निकाल दें . सवेरे नंगे पाँव मुलायम दूब घास पर चलें . हरी सब्जियों का प्रयोग करें . तीन से चार लिटर पानी अवश्य पीयें .
                               देसी घी या तेल का दीया जलाकर त्राटक करें . कुछ क्षण लगातार लौ को देखकर आँखें बंद कर लें .   उगते बाल सूर्य का कुछ क्षण त्राटक करें .इसे सूर्य साधना या सविता साधना भी कहा जाता है . प्रारम्भ में  लगभग आधा मिनट भी काफी रहेगा . सूर्य को अर्घ्य दें और उस पानी की धारा में सूर्य की रोशनी को देखें .
                                  कम उम्र है और B P या heart problem नहीं है तो शीर्षासन और सर्वांग आसन भी लगभग  2-5 मिनट तक करना,  लाभप्रद होता  हैं .

वृक्क (kidney)

वृक्क अर्थात किडनी खराब होने से क्रेटनिन का level  2-3 से भी अधिक पहुंच जाता है . अमूमन यह एक डेढ़ से ज्यादा नहीं होना चाहिए . इस बीमारी के मुख्य कारण हैं ; कृत्रिम उर्वरक और कीटनाशक ! इन्हें छानते छानते किडनी की हालत खराब हो जाती है .
                            कपाल भाति और अनुलोम विलोम प्राणायाम अगर आधा आधा घंटा प्रतिदिन किया जाए तो एक दम लाभ होता है . हथेली के बीच में , और छोटी अंगुली के top पर acupressure करना चाहिए .
                                                   वृक्क दोषहर क्वाथ एक एक चम्मच का काढ़ा बनाकर लिया जा सकता है . या फिर वृक्क दोषहर वटी की एक एक गोली ली जा सकती है . पुनर्नवादी मंडूर आवश्यकता अनुसार लिया जा सकता है . साथ में चन्द्रप्रभावटी भी ली जा सकती है .
                                सुबह नीम के पत्तों का रस और शाम को पीपल के पत्तों का रस एक एक चम्मच लेने से किडनी के निष्क्रिय cells भी सक्रिय हो जाते हैं .
                      Protein diet बिलकुल बंद कर देनी चाहिए . यहाँ तक कि मूंग जैसी दालों का प्रयोग भी न के बराबर कर देना चाहिए . नमक बंद कर दें या बिलकुल कम कर दें . पानी की मात्रा कम कर दें .
                          जिनका क्रेटनिन स्तर 14 तक पहुंच गया था , उन्हें भी इन उपायों को अपनाने से लाभ हुआ . Urea का स्तर 40 से नीचे होना चाहिए . जिन व्यक्तियों का urea का स्तर 100-150 तक आ गया था , उन्होंने भी प्राणायाम करके और प्राकृतिक चिकित्सा के तरीके अपनाकर लाभ उठाया .