Sunday, March 4, 2012

Psoriasis , eczema

psoriasis या eczema दोनों ही त्वचा के रोग हैं . Psoriasis की बीमारी में हाथ ,पैर पीठ और चेहरे तथा सिर तक में गोल चकत्ते हो जाते हैं . भयंकर खुजली होती है और खाल उधड़ने लगती है . इसके लिए डाक्टर steroids दे देते हैं . ये कुछ दिन तो आराम दे देते हैं पर बीमारी ठीक नही होती .
                                     Eczema में त्वचा खराब हो जाती है . धीरे धीरे त्वचा का रंग काला पड़ जाता है और पूरी चमड़ी खराब हो जाती है . इस बीमारी में हथेलियाँ और तलुए बुरी तरह फट जाते हैं . व्यक्ति दिन प्रतिदिन  के काम करने में भी असमर्थ हो जाता है .
                                 ये बीमारियाँ लीवर की विकृति के कारण हो सकती हैं . अगर कपालभाति प्राणायाम आधा घंटा तक (प्रारम्भ में पांच मिनट से बढ़ाकर धीरे धीरे आधा घंटा करना है ) किया जाए और अनुलोम विलोम प्राणायाम पन्द्रह मिनट तक किया जाए तो ये दोनों बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं और निशान तक गायब हो जाते हैं .
                               इस बीमारी में नमक और मीठा कम कर दें या बंद कर दें .   बैंगन , राजमां , उड़द , अरवी जैसी चीज़ें तो कभी न खाएं . सादा भोजन खाएं . अंकुरित अन्न और दालें खाएं . सलाद अधिक लें . पानी खूब पीयें . चिंता कम करें . प्रसन्न रहें .
                              काया कल्प वटी एक महीने में 20 ग्राम तक ले सकते हैं .
           रस माणिक्य 1-2 ग्राम +ताल सिन्दूर 2-4 ग्राम +अमृता (गिलोय) सत 10-20 ग्राम ;  इन सभी को मिलाकर पावडर कर लें . इसकी 60 पुडिया बनाएं . सुबह शाम एक एक पुडिया खाली पेट पानी के साथ लें .
   इसके साथ गिलोय घन वटी 1-2 और नीम घन वटी 1-2 तक खाने के बाद लें .
            Psoriasis के साथ कई बार arthritis भी हो जाता है . इसके लिए कैशोर गुग्ग्लु भी ले लें.
   बाकी सब चीज़ न भी लें,  केवल कायाकल्प वटी लेने से और काया कल्प तेल के लगाते रहने से भी त्वचा की सभी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं . अपना पेट भी साफ़ रखें . इसके लिए त्रिफला चूर्ण , आंवला इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है .


                            

आंव (colitis)

आंव या संग्रहणी की समस्या होने पर बार बार शौच जाना पड़ता है . खाना खाते ही शौच की इच्छा होती है . इस बीमारी के कारण काफी कमजोरी आ जाती है . आँतों में सूजन और घाव हो जाते हैं . Ulcer भी हो जाते हैं .
                       इस बीमारी में दूध , घी और मीठा बिलकुल बंद कर देना चाहिए . इस बीमारी में छाछ का प्रयोग सर्वोत्तम है . दोपहर में छाछ में लवणभास्कर या हिंगवाष्टिक चूर्ण मिलाकर पी लें तो बहुत आराम आता है . अन्यथा छाछ में जीरा और सेंधा नमक डालकर ही पी लें .
                          कच्ची बेल का पावडर सवेरे शाम एक एक चम्मच पानी के साथ लेते रहने से भी यह बीमारी ठीक होती है . अनार के दाने खा लें या अनार का जूस खाली पेट लेते रहने से तो यह बीमारी अवश्य ही ठीक होती  है .
                    समस्या बहुत ही अधिक हो तो कुट्जारिष्ट 4-4 चम्मच लिया जा सकता है . अगर दस्त लगे हों तब भी  यह बहुत लाभदायक है . कुटजघनवटी या चित्रकादीवटी आंव की समस्या तो ठीक करती ही हैं साथ ही पाचन तन्त्र को भी मजबूत करती हैं .
                         गंगाधर   चूर्ण 50 ग्राम +बिल्वादी चूर्ण 50 ग्राम +शंख भस्म 10 ग्राम +कपर्दक भस्म 10 ग्राम +मुक्ताशुक्ति भस्म 10 ग्राम  ;   इन सबको मिलाकर एक एक चम्मच सवेरे शाम पानी के साथ लेने से colitis की बीमारी में पूरा आराम आता है .
                इसके अतिरिक्त सवेरे प्राणायाम करें . कपालभाति प्राणायाम बहुत धीरे धीरे करें . इससे आंव ठीक हो जायेंगे . लेकिन जोर से कपालभाति प्राणायाम करने पर , आँतों की सूजन बढ़ सकती है .
                   पैर की पिंडलियों को दबाने से और एक दो मिनट ताली बजाने से यह बीमारी जल्दी ठीक होने में सहायता मिलती है .

कूठ (costus) (saussurea lappa)


 
 
कूठ को कूट भी कहते हैं . यह हिमालय क्षेत्र में 8000-9000 फुट की ऊँचाई पर पाया जाता है . संस्कृत में इसे हरिभद्रक या पुष्कर भी कहते हैं . बाज़ार में इसकी सूखी जड़ ही मिलती हैं . यह दुर्लभ औषधि है , अत: इसकी शुद्धता की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए . इसके पत्ते चौड़े होते हैं और फूल गोल गोल होते हैं .
                इसका प्रयोग मुख्यत: स्नायु शक्ति को बढाने में और रक्त संचार बढ़ाने में किया जाताहै . इसकी जड़ के पावडर को मक्खन या तेल में मिलाकर शरीर पर मालिश करने से रक्त संचार बढ़ता है . स्नायु की कमजोरी खत्म होकर ताकत आती है . सर्दी ज़ुकाम होने पर इसका पावडर दूध , शहद या पानी के साथ लें . इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है .
                                               High B P हो तो इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए . लेकिन यह low B P को ठीक करता है . Low  B P होने पर इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम ले सकते हैं . Periods में दर्द होता हो या कम होता हो तो , periods शुरू होने से 10-15 दिन पहले इसे एक एक ग्राम सुबह शाम लेना प्रारम्भ कर दें . अनियमित periods होने पर भी इसे लेने से आराम आता है . पुरुषों को कमज़ोरी हो तब भी यह लाभदायक है .
                                                     शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द हो , पेट में दर्द हो या किसी अन्य प्रकार का दर्द हो तो , हल्दी+मेथी +सौंठ +अश्वगंधा +कूठ को मिलाकर कुछ दिनों तक लें . पेट में कीड़े हों , मचली हो , या दर्द हो तो , इसको आधा ग्राम की मात्रा में दिया जा सकता हैं . यह शरीर को उत्तेजित करता है ; इसलिए बच्चे की प्रकृति के अनुसार ही उसे दें . बहुत अधिक न दें .
                     कैंसर की दवाइयों के साथ इसे भी ले लिया जाए तो शरीर को जल्द ताकत लाने में सहयोगी रहता है . Paralysis के रोगी भी आधा से एक ग्राम तक इसे अपनी औषधियों के साथ साथ ले सकते हैं . इससे स्नायुओं को ताकत मिलेगी और वे बहुत जल्दी अच्छे हो जायेंगे .
                  बुखार होने पर इसे आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ लें . इससे बुखार में आने वाली शारीरिक शिथिलता दूर होती है . गिलोय , तुलसी , मुलेठी और गाजवा के काढ़े के साथ कूठ भी मिला ली जाए , तो बुखार जल्द ही ठीक होता है . दमा होने पर श्वसारी रस में या खांसी के काढ़े में कूठ का पावडर मिलाकर लें .
                        त्वचा की किसी भी परेशानी के लिए इसके पत्ते को पीसकर उसका रस लगाएं.  इससे eczema , दाद , खुजली , एलर्जी आदि सभी त्वचा के रोग ठीक होते हैं . इससे झाइयाँ , कील मुहासे आदि भी ठीक होते हैं . पत्ते न मिलें तो इसकी जड़ चन्दन की तरह घिसकर लगायें . इसको लगाने से घाव भी भर जाते हैं .
                         













Saturday, March 3, 2012

अनिद्रा

तनाव हो या चिंता हो तो नींद ही नहीं आती . कई बार वैसे ही नींद नहीं आती . यह बीमारी का रूप ले लेती है .
          अगर खाना खाने के एक डेढ़ घंटे बाद बिस्तर में सोने के लिए जाएँ तो अच्छी नींद आ सकती है .खाना भी भूख से कुछ कम ही खाएं तो ठीक रहता है । सोने से पहले बिस्तर पर बैठ जाएँ . साँसों पर ध्यान दें और अनुलोम विलोम विलोम प्राणायाम धीरे धीरे करें . आपको नींद आने लगेगी . अगर कमरे में अकेले हैं और कोई disturb नहीं कर रहा ; तो भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम करना भी अच्छा रहता है .
           Ring finger के top पर दो मिनट तक दबाते रहें . गर्मियों में अमृत रसायन का प्रयोग करें या आंवले का जूस पीयें .
मेधावटी 1-1 गोली सवेरे शाम लें . अगर B P high है तो सवेरे शाम मुक्तावटी भी साथ में चबा चबाकर खाएं .        

            अगर फिर भी नींद नहीं आती तो जटामासी 100 gm +सर्पगंधा 50 gm मिलाकर पावडर बनाकर रख लें .  केवल कुछ दिन तक, इसे 2 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सोते समय लें . यह मस्तिष्क को ताकत देता है और नींद भी अच्छी आती है . 5 ग्राम भांग के पावडर में 1-2 ग्राम सर्पगंधा का पावडर मिलाकर सोते समय लेने से भी नींद ठीक होनी प्रारम्भ हो जाती है ।यह दवा भी कुछ दिनों तक ही लेनी चाहिए ।
               सहदेवी के छोटे छोटे से पौधे को शयन कक्ष में रखा जाए या फिर सूखे सहदेवी के पौधे को तकिये के नीचे रखने से भी नींद बहुत अच्छी आती है ।

Friday, March 2, 2012

खून की कमी

 पुरुषों में लौहतत्व 14-16 ग्राम और महिलाओं में यह 12-14 ग्राम तक होना चाहिए .  अक्सर इसकी मात्रा महिलाओं में तो बहुत कम होती ही है ; लेकिन पुरुषों में भी इसकी कमी देखी गई है . शरीर में हर समय थकान रहना इसका मुख्य लक्षण है . अगर शरीर में भरपूर लौह तत्व की मात्रा है तो व्यक्ति दिन में 18 घंटे तक भी काम कर सकता है .
                           लौह तत्व के साथ शरीर में कैल्शियम और विटामिनों और खनिज तत्वों की भी कमी हो जाती है . इसके लिए केवल गेहूँ या चावल ही नहीं बल्कि सभी तरह का अनाज खाना चाहिए . बल्कि सभी अनाज मिला जुलाकर हर रोज़ खाने चाहियें .
                    बाजरा , ज्वार, रागी आदि अनाजों में अधिक लौह तत्व होता है . केले , अमरुद , मुनक्का , अंजीर , आंवला , aloe vera और गेहूँ के जवारे में भरपूर लौह तत्व होता है . गाजर , लौकी (कडवी न हो ) , हरी सब्जियों को खूब खाना चाहिए . गर्मियों में आठ दस मुनक्का भिगो कर खाएं . इससे कब्ज़ भी नहीं रहता .
                        कपालभाति प्राणायाम भोजन के पोषक तत्वों को आँतों में अवशोषित करने में मदद करता है . हर रोज़ नियमित रूप से, जितना संभव हो, कपालभाति प्राणायाम सुबह - शाम अवश्य करना चाहिए . यह प्राणायाम शरीर के भीतर की शक्ति को जागृत करता है . इस प्राणायाम को करने से शरीर में लौह तत्व और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है . बाकी सभी प्राणायाम भी इसमें लाभदायक होते हैं .
                           











                           

poly cystic ovary

Poly cystic ovary की समस्या  बहुत सी महिलाओं को रहती है . नियमित रूप से periods न होना ; या फिर बहुत बहुत समय के बाद होना या अचानक ही रुक जाना . इसके लिए हर बार hormones लेने पड़ें तो वह भी ठीक नहीं रहता . इस समस्या के होने से मुटापा भी बढ़ सकता है .
               इसका इलाज बिना दवाइयों के भी हो सकता है . हर रोज़ सवेरे शाम खाली पेट कपालभाति प्राणायाम किया जाए . धीरे धीरे इसका समय बढ़ाकर आधा आधा घंटा कर दिया जाए तो बहुत जल्दी यह समस्या ठीक हो जाती है . समय पर संतुलित आहार लें . Fast food से  बचें . तनावमुक्त रहें .
                                                         जड़ी बूटियों में वृद्धिबाधिका वटी , कांचनार गुग्ग्लु या कांचनार क्वाथ का प्रयोग कर सकते हैं . अगर   fibroids या cyst हैं तो इनके साथ शिलासिंदूर 2-4 ग्राम , प्रवालपिष्टी , अमृता सत , कामदुधा रस आदि का प्रयोग भी हो सकता है .  दशमूलारिष्ट और अंजीर का नित्यप्रति सेवन से भी poly cystic ovary की समस्या में बहुत लाभ होता है .
             सभी प्राणायाम भी इसके उपचार में सहायक होंगे . कपालभाति प्राणायाम तो अवश्य करना ही है .

Wednesday, February 29, 2012

मिर्गी (epilepsy)

मिर्गी की बीमारी का अंग्रेजी दवाइयों से कंट्रोल तो हो जाता है , लेकिन cure नहीं होता . इसके लिए अंग्रेजी दवाइयां लम्बे समय तक ली जाएँ तो memory कमजोर हो जाती है .
                  ऐसे रोगी सभी तरह के प्राणायाम करें . खास तौर पर अनुलोम-विलोम , भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम लगातार करते रहने से यह बीमारी ठीक हो जाती है . मेधावटी   (इसमें ब्राह्मी , शंखपुष्पी , वचा , गाजवान, अश्वगंधा आदि होते हैं )  की एक एक गोली सवेरे शाम लेने से अद्भुत लाभ होता है और यह बीमारी पूरी तरह से cure हो जाती है . बड़े लोग दो दो गोली ले सकते हैं .
                                          पीपल या बड़ की जटा या दाढी को उबालकर ले सकते हैं . मेधाक्वाथ का एक चम्मच का काढ़ा सवेरे शाम ले सकते हैं ( अगर मेधावटी न ले रहे हों ) . सारस्वतारिष्ट का प्रयोग कर सकते हैं . तीन से पांच बादाम (खाली पेट )पीसकर ले सकते हैं . अखरोट लेना भी लाभप्रद रहता है . 
                 अंगूठे के top पर pressure से दबाते रहें . इसी तरह ring finger के top पर दबाना भी इस रोग से मुक्ति पाने में सहायक रहता है .