Saturday, February 2, 2013

गाजर (carrot)


                                 











                              गाजर का हलवा सर्दियों में सर्वाधिक प्रिय मिष्ठान्न होता है । गाजर का जूस और गाजर का मुरब्बा बहुत पौष्टिक माने जाते हैं । नियमित रूप से  इन्हें लेने रहने से अनीमिया ठीक हो जाता है और खून की कमी नहीं होती । दूध में शहद मिलाकर गाजर के मुरब्बे के साथ सेवन करने से शरीर में शक्ति आती है ।
                                        यह पित्तनाशक होता है । अगर भूख कम लगे तो इसका अचार खाने से भूख बढ़ती है । यूरोप के देशों में पीलिया होने पर गाजर का रस पिलाया जाता है ।  आँत में कीड़े हो जाएँ तो गाजर का रस पीएँ और इसकी सब्जी खाएँ ।  White Discharge की शिकायत हो तो गाजर के रस में आंवला और पुदीना मिलाकर सेवन करें ।
      शरीर में सूजन हो या कहीं पर फोड़े हों तो गाजर के पत्ते पीसकर पुल्टिस बांधें । गाजर को उबालकर नमक मिलाकर पुल्टिस बाँधने से भी सूजन ठीक होती है ।    माइग्रेन या sinus की समस्या हो तो इसकी पत्तियों को सेककर उनका 4-4 बूँद रस नाक में डालें ।  कहीं पर शरीर जल जाए तो तुरंत गाजर काटकर और घिसकर लगाएं ।
Periods में दर्द होता हो या समय पर न आते हों तो नियमित रूप से गाजर की सब्जी खानी चाहिए । इससे हारमोन की सभी गडबडी दूर होती हैं । Delivery के बाद अजवायन और गाजर के बीजों का काढ़ा लिया जाए तो uterus की ठीक प्रकार शुद्धि होती है और infections नहीं होते ।
                                    पेट में अफ़ारा हो तो अजवायन ,जीरा और गाजर के बीज मिलाकर लिया जा  सकता  है । किडनी की समस्या हो तो गाजर के बीज और धनिया मिलाकर सेवन करें ।





फिर बुलाइए ना !

                                                     बालकोनी में कपड़े सुखाते हुए जैसे ही इंदुजी ने मुझे देखा , वैसे ही तुरंत उन्होंने गैस पर चाय का पानी चढ़ा दिया । दरवाजे पर मेरे पहुंचने पर वे बहुत आत्मीयता से गले मिलीं । मन कितना हर्षित और तृप्त हुआ ; बताया नहीं जा सकता !
                                                         अमेरिका से उन्हें आए  कुछ दिन बीत चुके थे , लेकिन मिलना नहीं हो पाया था । "चलो धूप में बाहर बालकोनी में बैठते हैं ।" कहते हुए वे मेरे लिए मिष्ठान्न भी ले आई थीं ।  उनकी फुर्ती देखते बनती है । मैं सच कहती हूँ; मैं हो ही नहीं सकती इतनी अधिक फुर्तीली ! मसालेदार चाय की चुस्कियां लेते हुए हमारी गप्पबाज़ी होने लगी । आई पैड पर उनकी दक्षता देखकर मुझे बहुत हर्ष का अनुभव हुआ . "अब ये जरूर ब्लॉग लिखना शुरू कर सकती हैं ; बस इन्हें प्रेरित करते रहना पड़ेगा ।"  मैंने मन में सोचा ।
  " दोपहर के भोजन का समय हो गया है ; चलो खाना खाया जाए ।" उन्होंने पूछा तो मैंने सहर्ष सहमति जताई .
                          "गेहूँ की रोटी खाओगी , बाजरे की या मक्का की ?"
                                                                                  "वाह ! कितनी चॉइस है । इंदुजी का भी जवाब नहीं ।" मैंने सोचा । कोई औपचारिकता तो निभानी थी नहीं । मैंने कहा ," बाजरे की रोटी खानी है । सालों-साल  साल बीत गए, बाजरे की रोटी खाए !"
                                                        तुरंत बाजरे का आटा गूंधकर , इंदुजी ने मुझे दही में जीरा पावडर डालने का निर्देश दिया  और थाली में बेसन के चीले की सब्जी रख दी । एक सूखी सब्जी भी थी । अब रसोईघर में ही गर्मागर्म पतली पतली बाजरे की रोटियों  का लुत्फ़ मैं उठाने लगी । वाह ! क्या बाजरे की रोटियाँ थीं । पेट में ही नहीं वे तो सीधे आत्मा में उतर गईँ ! स्नेहसिक्त आटे में भावविभोर हृदय का प्रेम समा गया था । इंदुजी ने भी खाना खाते हुए  कहा , " इतनी स्वादिष्ट बाजरे की रोटी तो कभी कभी ही बन पाती हैं ।"
  इंदुजी ! मुझे दोबारा फिर आना पड़ेगा, आपके हाथ की बाजरे की रोटी खाने के लिए। 
तैयार हैं न आप ?


Sunday, January 27, 2013

प्रतीक्षा !
















मेरा आँगन सूना है ।
बिल्ली उपालम्भ देकर ,
धीरे से खिसक जाती है ।
कुक्कुर की भौं भौं ,
व्यर्थ चली जाती है ।
चिडिया कनखियों से देखती
 चुपचाप दाने चुगती है ।
अब चूँ चूँ कौन कहेगा ?
उनको देखकर इशारा कर,
"ओऊ ओऊ " कौन करेगा ?
पवन हैरान  है .........
"नन्हे नन्हे वस्त्रों को,
 झूला कैसे झुलाऊँ ?
कहाँ विलुप्त हो गये वस्त्र ?
दिखते क्यों नहीं ? "
सोचकर परेशान है !
पार्क में बच्चों का खेलता  हुजूम ,
बार बार बरामदे  को निहारता है .
नन्हे की झलक पाने को आतुर आँखें
निराश होकर दोबारा क्रिकेट  बैट पर,
टिक जाती हैं ।
अचानक एक नन्हीं आवाज,
कानों में पडती है ;
"आंटी , वह  कब आएगा ?
उसको "पाली पाली" करनी है "
दो भोली आँखें प्रश्न कर रही हैं ।
मैं सिहर जाती हूँ !
सूनेपन में डूबे दो मौन अश्रु ,
मेरे हृदय को बींधते हुए लुढक जाते हैं ।
मेरे कम्पित होठों से,
अस्फुट उत्तर निकलता है ;
"दादी भेजेगी, तब आएगा "




Monday, December 17, 2012

गन्ना (sugar cane )



                                                 
गन्ने का नाम सुनते ही मुँह में रसधार बहने लगती है । यह भोजन करने से पहले चूसा जाए तो भूख बढ़ाता है और खाने बाद चूसा जाए तो पाचन शक्ति को बढाता है । इसके चूसने से दाँत और मसूढ़ों की मालिश होती है । मिश्री गन्ने के रस से ही बनती है । इसको किसी भी औषधि के साथ मिलाकर लिया जाये तो औषधीय गुण बढ़ जाते हैं ।
                    पीलिया रोग में इसका रस लिया जाए तो पीलिया जल्द ठीक होता है । इसके रस में धनिया और अदरक भी मिला लें तो और भी अच्छा रहेगा । इसका छिलका उतारकर , रात को ओस में रखकर अगर सवेरे इसे चूसा जाए तो लाभ और भी अधिक होता है । गन्ने के रस में अनार का रस मिलाकर लिया जाए तो पीलिया भी जल्द ठीक होता है और शरीर में खून की भी कमी भी नहीं होती ।
                             इसकी जड़ kidney के लिए बहुत लाभकारी है । इसके सेवन से पेशाब की जलन भी खत्म हो जाती है । Diabetes की बीमारी में भी इसकी जड़ का काढ़ा पीने से लाभ होता है । अगर रुक रुक कर पेशाब आता है तो इसकी 10 ग्राम जड़ का काढ़ा पीयें ।
                    इसके रस को चिकनी मिट्टी के बर्तन में रखें और 10-15 दिन तक उस रस से भरे बर्तन को मिट्टी में दबा दें । इसके बाद उस बर्तन में गन्ने का सिरका बन जाएगा । इसे 20-25 ml की मात्र में सौंठ व काली मिर्च मिलाकर लिया जाए तो पाचन क्रिया बहुत अच्छी हो जाती है । कमजोर पाचन वाले रोगियों के लिए यह बहुत अच्छी औषधि है । अगर भोजन करने के बाद थोडा गुड खा लिया जाए तो भी भोजन का पाचन अच्छी तरह होता है । गुड जीवनी शक्ति प्रदान करता है और ताकत को बढाता है ।
                                           जूट का ऐसी बोरी (बैग ) लें , जिसमे कि पिछले दो तीन साल पहले गुड का storage किया गया हो । इस बोरी को जलाकर राख कर लें । यह राख औषधि का कार्य करती है । इसकी 2-2 ग्राम की मात्रा लेने से रक्त प्रदर और श्वेत प्रदर (white discharge ) की बीमारी ठीक होती है । अगर द्स्त लगे हों तो इसे लेने से वे तुरंत बंद हो जाते है । दस्त होने पर गुड के साथ बेल का पावडर भी लिया जा सकता है ।
                                                     खांसी में पुराना गुड दवाई का कार्य करता है । पुराना गुड +अदरक +काली मिर्च मिलाकर गोलिया बना लें । इन्हें चूसते रहने से खाँसी ठीक हो जाती है । गला बंद हो गया हो तो गन्ने के टुकड़े  को आग में भूने और उसे चूसें । इससे गला तुरंत खुल जाएगा ।
                                 



             




                                   
                   
                         

Thursday, December 6, 2012

Happy birthday Mummiji !



मेरी पुत्रवधू रिद्धिमा ने यह प्यारी सी कविता मेरे जन्मदिवस पर मुझे भेंट की :


Someone who loves someone who cares
Someone who makes the day bright again
I feel very gracious
Coz few things in life are as precious

A morning cup of tea together
After a stroll in the garden
I know my day has started well
And I am ready to face my struggles

Talk about yummy kale chane or aloo matar
All I want is to lick my fingers
I see Her speed & efficiency
Her patience & energy
Can I ever get close to acquiring these qualities?

I know I will always have Her lap
When I am not well
With one affectionate wave of her hand
I will become sound as a bell

Her pearls of wisdom
Act like light to guide my path
I know I will never be alone
Coz She is around to hold my hand

I thank Her
For accepting me as Her child
For forgiving my mistakes
And making me a part of Her life

I hope She knows
That being with Her makes me love life more
I can’t help being loquacious
Coz few things in life are as precious




Wednesday, October 17, 2012

आँचल की अक्षमता !!




माँ के आँचल का ताना बाना ,    
सोख लेता संताप ; संतान के ।
उनके विषाद के गहराए बादल,
बरसने से पहले ही उलझ जाते हैं;
माँ के मुलायम आँचल में ।
धूप की कठोर किरणें,
कसमसाती हुई ,
अटक जाती हैं ;
माँ के सशक्त आँचल में ।
आंधी तूफ़ान हल्की सी हलचल भी ,
छू नहीं पाती बच्चों का तन मन ;
आँचल की दीवार जो है सबल !
सब कुछ पी जाता है ,
झेल लेता है चुपचाप ,
माँ का मूक आँचल ।
फिर भी असफल है ;
 अक्षम है माँ का आँचल ।
वह सोख नहीं सकता ,
 माँ की आँख की कोर से ,
ढरकते  दो  अश्रु !!

Friday, October 12, 2012

अमरुद(guava)



अमरुद को संस्कृत भाषा में दृढबीजम कहा जाता है । इसके बीज कठोर होते हैं । उन्हें चबाना कठिन होता है । और मजेदार बात यह है कि उन्हें चबाना ही नहीं चाहिए , बल्कि निगल लेना चाहिए । अमरुद के गूदे को चबाकर बीजों को ऐसे ही निगल लेना चाहिए । इस प्रकार से अमरूद को खाया जाए ,तो यह फल intestines के लिये सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । यह फल पेट के लिए लाभकारी और गुणकारी माना गया है । यह कब्ज़ को दूर करने वाला और मन को प्रसन्न रखने वाला फल है । मल को रेचन करने का गुण इसके बीजों में होता है ; बशर्ते कि उन्हें निगला जाए ।
              यह फल सभी के लिए निरापद है । मधुमेह का रोग हो या किडनी की परेशानी ; सभी बीमारियों में इसका सेवन बेझिझक किया जा सकता है । यह त्रिदोष नाशक है । अर्थात वात पित्त और कफ का नाश करता है । विभिन्न प्रकार के रोग मात्र अमरुद से ही ठीक किए  जा सकते हैं । यह हृदय को शक्ति प्रदान करता है और घबराहट और बेचैनी को दूर करता है ।
      यह फल मस्तिष्क को तुरन्त ताकत देता है । एक दो फल खाने के बाद पुन: शरीर और मस्तिष्क में स्फूर्ति  वापिस आ जाती है । यह दाह नाशक है । हाथ , पैरों की जलन को समाप्त करता है । यह फल , कमजोरी और मूर्छा को ठीक कर देता है ।
                            खाँसी होने पर , इसके कम पके फल के टुकड़े करके उनमे नमक लगाएँ और आग पर भूनें । फिर उस अमरुद को चबा चबाकर खाएँ । इस प्रकार करने से पुरानी से पुरानी खाँसी  भी दूर हो जाती है । लीवर damage हो गया हो या भूख कम लगती हो ; तब भी अमरुद को इसी प्रकार खाना चाहिए । खाना खाने से कुछ देर पहले इस फल को खाया जाए तो यह आँतों और liver के लिए बहुत अच्छा रहता है । खाने के बाद इस फल को खाया जाए तो विरेचन काफी अच्छा होता है परन्तु इसके लिए भोजन कम मात्रा में खाना होगा ।
                                               मसूढ़ों के दर्द के लिए इसके पत्तों का प्रयोग किया जा सकता है ।इसके पत्तों को कूटकर उसमें नमक और लौंग मिलाकर उबाल लें । इस पानी से गरारे और कुल्ले करें । इससे मुख की दुर्गन्ध भी दूर होगी और मुँह  के छाले भी ठीक हो जायेंगे । मुंह में छाले हो गए हों तो इसकी कोमल पत्तियाँ चबाएँ । इन्हें निगल भी सकते हैं । तब भी यह लाभ ही करेंगी ।
                                     खाँसी या कफ होने पर इसके पत्तों का काढ़ा पीएँ । सूखे पत्तों का काढ़ा भी खांसी को ठीक करता है । यह काढ़ा बुखार को भी ठीक करता है । अपचन होने पर इसकी छाल , पत्तियां और सौंठ मिलाकर काढ़ा बनाएँ और सवेरे शाम पीएँ । संग्रहणी या अतिसार की समस्या से भी यह काढ़ा मुक्ति दिलाता है । इसके ताज़े या सूखे पत्तों में तुलसी मिलाकर चाय भी बनाई जा सकती है । यह बहुत लाभप्रद होती है । छोटे बच्चों को colitis की समस्या हो तो इसकी जड़ का छिलका 2 ग्राम लेकर उसका काढ़ा बनाकर दे सकते हैं ।
                                           अमरुद के सेवन से पुराने से पुरानी अतिसार की समस्या ठीक हो जाती है । पेट में कीड़े हों तो नमक के साथ अमरुद का सेवन करें । भांग का नशा चढ़ गया हो तो इसके पत्तों का रस पिला दें या फिर अमरुद खिलाने से भी भाँग का नशा उतर जाता है ।