Saturday, March 22, 2025

सेहत के सीक्रेट्स

 सेहत और खुशी जिसके जीवन में यह दो चीज हों; उसे फिर कुछ और नहीं चाहिए। सेहत को ठीक रखना बहुत जरूरी होता है। स्वास्थ्य ही तो अनमोल धन है। कहां भी गया है, "पहला सुख निरोगी काया।"

सेहत को किस प्रकार दुरुस्त रखा जाए, इसके लिए कुछ सीक्रेट्स हैं:

सेहत को अच्छा रखने के लिए सबसे पहला सीक्रेट है कि मन मे नकारात्मक विचार बिल्कुल न लाएं। काम में या दबाव में अक्सर नकारात्मक विचार हावी हो जाते हैं; जिसे ब्रेक करना मुश्किल हो जाता है। अगर ऐसा है तो अभी से प्रण लें कि किसी से कोई शिकायत मन में नहीं रखेंगे और अगर शिकायत है भी तो उसे स्वयं ही दूर करने की कोशिश करेंगे।

 दूसरा सीक्रेट यह है कि तनाव पर काबू पाएं। इसमें सबसे अच्छा होगा कि अधिक सोचना बंद करें। गहरी सांस लें। धीरे-धीरे सांस को छोड़ें। केवल वर्तमान का ही सोचें और आसपास की अच्छी चीजों को महसूस करें। 

काम करते समय अगर मानसिक थकावट की समस्या है तो दस दस दस का फार्मूला अपनाएं। हर 10 मिनट बाद 10 फुट की दूरी पर 10 सेकंड के लिए देखें। इससे मानसिक थकावट कम होगी।

नींद की समस्या है तो पीठ के बल लेटें और रिवर्स काउंटिंग करें यानी उल्टी गिनती गिननी शुरू करें। यकीन मानिए इससे आप तनाव मुक्त होंगे और नींद भी आ जाएगी। 

इसके अतिरिक्त शारीरिक सक्रियता के साथ-साथ सामाजिक सक्रियता को भी बढ़ाएं। 

अपना स्क्रीन टाइम घटाना चाहिए। मोबाइल और टेलीविजन का ठीक-ठीक उपयोग करना चाहिए। इनका आवश्यकता से अधिक उपयोग करने से भी तनाव ग्रस्त हो सकते हैं।

संतुलित भोजन के साथ-साथ योग अभ्यास और प्राणायाम तो नितांत आवश्यक हैं ही, तनाव मुक्त और सेहतमंद रहने के लिए।

सेहत अगर अच्छी हो और जीवन में तनाव न हो, तो खुशियों का भरपूर आनंद लिया जा सकता है।





Friday, March 21, 2025

नगदी और न्याय

 मकान धूं धूं करके जल रहा था। आसपास सभी इकट्ठे हो रहे थे। "अरे भाई! फायर ब्रिगेड को फोन करो।" किसी ने आनन फानन में फायर ब्रिगेड को फोन लगाया। दस मिनट के अंदर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आ गईं और तुरंत आग बुझाने का प्रयत्न प्रारंभ हो गया।

 यह मकान एक जज साहब का था। अचानक ही उसमें आग लग गई थी और पूरा घर जल रहा था। बहुत प्रयत्न करने के बाद आग को काबू में लाया गया। 

आग बुझाने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने मकान के सभी सामान को सावधानीपूर्वक हटाना प्रारंभ किया। 

जैसे ही वह अंदर के कमरे में घुसे तो भौचक्के रह गए। वहां हैरान कर देने वाला नजारा था।  कमरे में नोटों से भरी हुई बोरियां थीं। जिन में करोड़ों की संख्या में नोट थे। अधजले नोटों के बंडल से बोरियां ठसाठस भरी हुई थीं। अधिकतर नोट पानी गिरने की वजह से भीग भी गए थे। 

"अरे जज साहब तो न्याय करते हैं! वे तो बहुत ईमानदार न्यायाधीश हैं। उनके पास इतनी नगदी?" हैरान होकर सभी सोच रहे थे।

कुछ महीनों बाद समाचार पत्र के मुखपृष्ठ पर जज साहब के जेल जाने की खबर छपी थी।

Wednesday, March 19, 2025

मुंह के छाले

 मुंह के अंदर अगर छाले हो जाए तो बड़ी कठिनाई होती है। ऐसे में यह समझ नहीं आता कि छाले किस प्रकार ठीक हों?

 इसका बड़ा सरल उपाय है, एलोवेरा का जैल! एलोवेरा का थोड़ा सा गूदा निकाल कर, प्रभावित स्थान पर लगाऐं। ऐसा बार--बार करने पर छाला अपने आप ही ठीक होना प्रारंभ हो जाता है।

 है तो यह सरल उपाय; परन्तु है बहुत कारगर!

Monday, February 24, 2025

खांसी और गरारे

 बहुत दिनों से लगातार खांसी चल रही हो; गले के अंदर दर्द भी हो और खांसी ठीक होने में न आ रही हो ; तो एक घरेलू नुस्खा बहुत ही लाभदायक रहता है। 

खांसी होने पर, नमक के गुनगुने पानी के गरारे तो करने ही चाहिए। लेकिन यदि गरारे के गुनगुने पानी में नमक के अतिरिक्त थोड़ी हल्दी और थोड़ा एलोवेरा का गूदा मिलाकर, उससे गरारे किए जाएं तो बहुत चमत्कारिक रूप से लाभ हो जाता है। 

दिन में तीन-चार बार इस प्रकार के गरारे अवश्य ही करने चाहिएं। इससे खांसी से मुक्ति में वास्तव में ही आशातीत लाभ मिलता है।

Tuesday, November 5, 2024

गोविंद वंदना

 प्रतिदिन की दिनचर्या के कार्य करते समय मां हमेशा ही भजन गाती रहती थीं। इससे कार्य में तो मन लगा ही रहता था और शायद थकावट भी बहुत कम अनुभव होती होगी। यह भजन तो मैंने उनसे कई बार सुना है; इसीलिए मुझे बहुत अच्छा भी लगता है:

भगवान मेरी यह प्रार्थना है; भूलूं न मैं नाम कभी तुम्हारा 

निष्काम हो कर दिन रात गाऊं; गोविंद, दामोदर, माधवेति

गोविंद, दामोदर, माधवेति; हे कृष्ण, हे यादव, हे सखेति


प्यारे जरा तो मन में विचारो; क्या साथ लाये?अब ले चलोगे? 

जावे यही साथ, सदा पुकारो; गोविंद, दामोदर, माधवेति


 नारी, धरा, धाम, सुपुत्र प्यारे; सन्मित्र, सद्बांधव, द्रव्य सारे

कोई ना साथी, हरि को पुकारो; गोविंद, दामोदर, माधवेति


नाता भला क्या जग से हमारा?आए यहां क्यों?कर क्या रहे हो?

सोचो, विचारो, हरि को पुकारो; गोविंद, दामोदर, माधवेति


 सच्चे सखा हैं हरि ही हमारे; माता-पिता, स्वामी, सुबंधु प्यारे

 भूलो ना भाई, दिन रात गाओ; गोविंद, दामोदर, माधवेति


 माता यशोदा हरि को जगावे; जागो, उठो, मोहन! नैन खोलो 

 द्वारे खड़े गोप बुला रहे हैं; गोविंद, दामोदर, माधवेति 


डाली मथानी दधि में किसी ने; तो ध्यान आया दधिचोर का ही

 मीठे स्वरों से हरि गीत गाती; गोविंद, दामोदर, माधवेति


देहांत काले तुम सामने हो; बंसी बजाते मन को लुभाते

गाता यही, तन मैं नाथ त्यागूं; गोविंद, दामोदर, माधवेति।

Piles, fissure, fistula

 कायाकल्प वटी और अर्शोग्रिट वटी का सुबह सवेरे खाली पेट प्रयोग करके इन बीमारियों से शत प्रतिशत मुक्ति पाई जा सकती है। 

प्रभावित स्थान पर लगाने के लिए, एलोवेरा का गूदा सर्वोत्तम है। लेकिन उसमें जात्यादिघृत मिलाकर लगाने से बहुत जल्दी आराम आता है।

प्रातः काल खाली पेट ठंडे दूध में एक नींबू निचोड़ कर एकदम पी लेने से भी यह बीमारी ठीक होती है।

 इसके अतिरिक्त नागदोन नामक पौधे के एक दो पत्ते सवेरे सवेरे खाली पेट चबाकर खाने से भी इस बीमारी में आराम आता है।

यदि केले के अंदर, एक चने के दाने के आकार का, भीम सेनी कपूर का छोटा सा टुकड़ा डालकर; उसे बिना चबाए निगल लिया जाए; तब भी इन समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। यह प्रयोग भी सुबह खाली पेट ही करना चाहिए।

सुबह शाम, खाली पेट, धीरे-धीरे कपालभाति प्राणायाम नियमित रूप से करना चाहिए।  ऐसा करने से परिणाम बहुत शीघ्र आ जाते हैं।

खाना धीरे-धीरे चबा-चबा कर खाना चाहिए जिससे कि कब्ज न हो। अगर कब्ज हो तो रात को सोने से पूर्व त्रिफला लें।  मिर्च मसाले का अधिक प्रयोग न करें। घीया की सब्जी का अधिक प्रयोग करना बहुत लाभकारी रहेगा।

Sunday, November 3, 2024

शुश्रूषा

रेलगाड़ी रफ्तार से चलती जा रही थी। दिन ढल चुका था। सभी यात्री खाना खा चुके थे। प्रत्येक यात्री की सीट पर सफेद चादर और तकिये रखे जा चुके थे। रमेश अपने पिता, पत्नी और बेटे के साथ ट्रेन में सफर कर रहा था।

  सोने का समय हो गया था। इसीलिए रमेश ने सोचा की पत्नी और बेटे के लिए सीट के ऊपर चादर बिछा देता हूं; जिससे वे आराम से सो सकें। पिताजी तो अपनी चादर स्वयं ही बिछा लेंगे। 

ऐसा सोचकर उसने अपने बेटे और पत्नी के लिए सीट पर चादरें बिछा दीं और तकिये भी रख दिए। उसके बाद उसने पीछे मुड़कर देखा।

 उसका बेटा अपने दादाजी की सीट पर चादर बिछा रहा था।  उसके दादाजी आराम से बैठे हुए थे। फिर उसके बेटे ने उनका तकिया भी लगा दिया और अपने दादाजी को कहा, "दादाजी! अब आप आराम से सो जाइए।"