97 वर्षीया गुण माया बोहरा का सिर थोड़ा हिला, तो उनके रिश्तेदारों को प्रतीत हुआ कि शायद वे अभी जिंदा हैं। उनके पोते रसिक बोहरा ने बताया कि वे कीचड़ में आठ से नौ घंटे तक पड़ी हुई थीं। ऐसा लग रहा था कि शायद उनकी मौत हो गई है।
नेपाल के त्रिशूली बाजार में भयंकर बाढ़ आने पर नुवाकोट की गुणमाया बोहरा इस बाढ़ मे अपने घर में ही घिर गई। आसपास की सभी सडकें बाढ़ में बह गई और उनका मकान भी ढह गया। बाढ़ की मिट्टी और मकान का मलबा सभी उनके ऊपर आ गिरे। लगभग 8-9 घंटे तक वह मिट्टी और मलबे में दबी रही।
अचानक उनके थोड़ा हिलने डुलने से किसी की नज़र उन पर पड़ी। उनका सिर हिल रहा था। तुरंत बचाव कार्य कर्मचारी और उनके रिश्तेदार, कीचड़ और मलबे के बीच से उन्हें निकालने का प्रयत्न करने लगे।
आखिर जब उन्हें निकाला गया तो वे पूरी मिट्टी से लथपथ थीं। उनके कपड़े, बाल और मुंह सब कीचड़ से लथपथ थे। लेकिन वे चुपचाप शांत बैठी रहीं। उन्हें किसी प्रकार काठमांडू के बीर हॉस्पिटल में ले जाया गया।
उनकी उम्र इतनी बड़ी होने पर भी उनके शरीर पर किसी प्रकार के घाव के निशान नहीं थे। उनके पोते रसिक ने बताया कि वे बिल्कुल ठीक हैं। उसे लग रहा था कि यह तो चमत्कार है, कि इतनी बड़ी उम्र में भी वे इतनी बड़ी आपदा से सुरक्षित बाहर निकल आईं। उनका प्रपौत्र दीपक बोहरा भी बहुत खुश था। वह कह रहा था कि उनकी परदादी एक योद्धा की तरह प्रतीत हो रही हैं। वे युद्ध में हारी नहीं बल्कि विजयी होकर बाहर आई हैं।
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