Wednesday, July 8, 2026

फिर मत कहना कुछ कर न सके

 फिर मत कहना कुछ कर न सके

 नहीं जीवन अब तक संवर सके


 जब नर तन तुम्हें निरोग मिला 

 सत्संगत का भी योग मिला

 फिर प्रभु कृपा अनुभव करके, 

यदि भवसागर तुम तर न सके


तुम सत्य तत्व ज्ञानी होकर 

तुम सत्धर्मी, मानी होकर

यदि सरल, निरभिमानी होकर 

कामना विमुक्त विचर न सके


 जग में जो कुछ भी पाओगे

 सब यही छोड़ कर जाओगे 

पछताओगे, यदि तुम अपना

 पुण्यों से जीवन भर न सके


 जब अंत समय आ जाएगा 

 तब क्या तुमसे बन पाएगा?

 यदि शक्ति समय के रहते ही

 आचार विचार सुधर न सके