Monday, July 27, 2026

मौत से साक्षात्कार!

 गुजरात का कालू परमार गडरिया अपने अहाते में खड़ा हुआ था। अचानक उसे पीछे से एक धक्का लगा और किसी ने उसे दबोच लिया।

 जब तक वह देख पाता, कि किसने उसे दबोचा है; उससे पहले ही किसी ने कालू का हाथ अपने मुंह में दबा लिया। तब कालू परमार ने देखा कि एक सिंह ने पीछे से उस पर आक्रमण किया है।

 वह घबरा तो बहुत गया। उसने अपना हाथ छुड़ाने की जैसे ही कोशिश की; सिंह ने बैठे हुए कालू का एक पैर अपने पंजों के नीचे दबोच लिया और उसके ऊपर बैठ गया। 

            कालू को साक्षात मौत नजर आ रही थी। लेकिन उसने थोड़ा धैर्य से काम लिया। वह शांति से उसकी आंखों की तरफ देखता रहा और एक हाथ से उसकी गर्दन सहलाने लगा जैसे कि पालतू जानवरों के साथ करते हैं। हैरानी की बात यह हुई कि इस पर सिंह ने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी। वह कालू को देखता रहा। कालू भी उसकी तरफ देखता हुआ उसकी गर्दन धीरे-धीरे सहलाता रहा।

 ऐसा लग रह रहा था जैसे दोनों मौन भाषा में बातें कर रहे हों। कालू परमार को यही लग रह रहा था कि काल उसके सामने है। और वह किसी भी पल काल का ग्रास बन जाएगा। लेकिन फिर भी बिना हिम्मत हारे हुए वह ऐसे ही बैठा रहा और उसे सहलाता रहा। शायद उसके शांतिपूर्ण व्यवहार के कारण ही सिंह उस पर कोई आक्रमण नहीं कर रहा था।

 गांव वाले पीछे से पत्थर मारे जा रहे थे और शोर भी मचा रहे थे। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि सिंह कालू परमार को देख रहा था और कुछ भी नहीं कर रहा था। कालू परमार भी शान्ति से बैठा था। उसके अंदर का डर धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा था। शायद वह समझ रहा था की मौत आई, तब भी ठीक और बच गए तब भी ठीक। समभाव की अनुभूति के अतिरिक्त और कोई चारा भी तो न था।

 आधे घंटे के बाद, अचानक वह सिंह उठ खड़ा हुआ। वह अहाते से बाहर चला गया। कालू परमार ने राहत की सांस ली। उसे तो वह आधा घंटा एक युग के समान प्रतीत हुआ था। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह मौत के मुंह से बच गया है। वह सिंह को जाते हुए देखता रहा। जब वह चला गया, तो गांव वाले उसके पास आए।

 कालू परमार का वह हाथ जो सिंह ने अपने मुंह में लिया था; जख्मी हो गया था और उसमें दांत के निशान भी थे।  लेकिन उसे और कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। वह पूरी तरह सुरक्षित था। गांव वाले खुशियां मनाने लगे। 

लेकिन कालू परमार को अभी तक विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वह सिंह के पंजे से सकुशल बच गया है। शायद सिंह को भूख नहीं रही होगी। उसका पेट भरा हुआ होगा। तभी तो उसने कालू परमार को खाने की चेष्टा नहीं की। कालू परमार मन ही मन भगवान का धन्यवाद कर रहा था। उसके जीवन की यह सबसे आश्चर्य जनक घटना थी।

गांव वाले उसे हाथों पर ऊपर उठाकर नाचने लगे। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो वे मौत से साक्षात्कार की जीत का जश्न मना रहे हों!

Wednesday, July 8, 2026

फिर मत कहना कुछ कर न सके

 फिर मत कहना कुछ कर न सके

 नहीं जीवन अब तक संवर सके


 जब नर तन तुम्हें निरोग मिला 

 सत्संगत का भी योग मिला

 फिर प्रभु कृपा अनुभव करके, 

यदि भवसागर तुम तर न सके


तुम सत्य तत्व ज्ञानी होकर 

तुम सत्धर्मी, मानी होकर

यदि सरल, निरभिमानी होकर 

कामना विमुक्त विचर न सके


 जग में जो कुछ भी पाओगे

 सब यही छोड़ कर जाओगे 

पछताओगे, यदि तुम अपना

 पुण्यों से जीवन भर न सके


 जब अंत समय आ जाएगा 

 तब क्या तुमसे बन पाएगा?

 यदि शक्ति समय के रहते ही

 आचार विचार सुधर न सके