"मेरे सारे गहने कहां चले गए?" सरिता अलमारी के लॉकर को हैरानी से देखते हुए बोल उठी। उसने अपने पति अनिल को बुलाया और लॉकर दिखाते हुए बोली, "मेरे गहने तुमने लिए हैं क्या?"
"नहीं!" अनिल ने कहा, "मैंने तो कोई गहने नहीं लिए।"
"तो फिर मेरे गहने कहां चले गए? कहीं मैंने किसी और जगह तो अपने गहने नहीं रख दिए?"
सरिता ने पूरा घर अच्छी तरह देख लिया। कपड़ों की अलमारी, रसोई घर के सभी शेल्फ, स्टोर हाउस यहां तक की बाथरूम भी लेकिन कहीं पर भी उसके गहने नहीं मिले। अनिल भी बहुत हैरान हुआ।
"गहने कौन निकाल सकता है? कहीं तुमने ही तो निकाल कर कहीं और नहीं रख दिए गहने? गए तो कहां गए?"
तभी उनका बेटा संदीप घर वापस आ गया। वह खेलने के लिए बाहर गया हुआ था। सरिता ने संदीप से भी पूछा, "संदीप! मेरे लॉकर में मेरे गहने रखे हुए थे। वह नहीं मिल रहे हैं। क्या तुम्हें उनके बारे में कुछ मालूम है? तुमने घर में कहीं देख मेर मेरे गहने?"
संदीप 7-8 वर्ष का एक अबोध बालक था। उसे मोमो खाने का बहुत शौक था। वह रोज ही मोमो खाना चाहता था। लेकिन सरिता उसे रोज मोमो खाने के लिए पैसे नहीं देती थी। वह मोमो की दुकान पर जाता, तो मोमो वाला उसे कभी-कभी मुफ्त में ही मोमो खिला देता था। एक दिन मोमो वाले ने कहा कि तुम्हें अनलिमिटेड लाइफटाइम मोमो मिलेंगे।
यह सुनकर संदीप बहुत प्रसन्न हो उठा। उसने कहा, "ऐसा कैसे हो सकता है ?"
मोम वाला बड़े प्यार से संदीप से बोला, "बेटा! ऐसा हो सकता है। तुम्हें बस यह करना है कि अपने घर रखे हुए मम्मी के गहने मुझे दे जाओ।"
संदीप अपने घर आया। उसने किसी को कुछ भी नहीं बताया। उसने चुपचाप लॉकर से गहने निकाले और मोमो वाले को दे दिए। मोमो वाले ने उसे बहुत सारे मोमो दिए। उसने मन भर कर मोमो खाए और किसी को कुछ भी नहीं बताया। लेकिन अगले दिन जब वह मोमो वाले के पास गया, तो उसने पाया कि वहां मोमो वाला था ही नहीं। फिर वह दो-तीन दिन तक उसके पास जाता रहा। लेकिन मोमो वाला वहां वापस नहीं आया। वह निराश हो गया। लेकिन उसने घर में कुछ भी नहीं बताया।
अब गहनों की तलाश हो रही थी। उसकी मां उसे अपने गहनों के बारे में पूछ रही थी। तब उसे लगा कि उसे गहनों के बारे में सब कुछ सच-सच बता देना चाहिए। उसने सारी बात अपने माता-पिता को बता दी। अनिल उसके साथ वहां गया, जहां वह रोज मोमो खाता था। वहां पर कोई भी नहीं था। आस-पास पूछने पर पता चला कि वह कई दिन पहले से वहां से गायब है। यह भी पता चला कि वह आसपास की ही किसी झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में रहता है।
जब अनिल उसके झुग्गी ढूंढते हुए वहां पहुंचा, तो पता चला वह झुग्गी बेचकर कहीं चला गया है। वे दोनों बहुत निराश हुए। पर अब कर ही क्या सकते थे? संदीप बहुत अधिक दुखी हुआ। उसने अपने पिता से कहा कि उसने बहुत गलत काम किया है। आगे से वह ऐसा कभी भी नहीं करेगा। लेकिन अब गहने तो वापस नहीं आ सकते थे।
अनिल ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई। पुलिस वाले भी बहुत अधिक हैरान हुए। उन्होंने अनिल को आश्वासन दिया कि वे मोमो वाले को ढूंढने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। लेकिन वे आश्चर्य चकित थे इस बात पर, कि ऐसा कैसे हो सकता है कि इतनी तुच्छ वस्तु के लालच में आकर, एक अबोध बच्चे ने अपनी मां के सारे गहने, मोमो वाले के हाथ में थमा दिए?