Wednesday, July 8, 2026

फिर मत कहना कुछ कर न सके

 फिर मत कहना कुछ कर न सके

 नहीं जीवन अब तक संवर सके


 जब नर तन तुम्हें निरोग मिला 

 सत्संगत का भी योग मिला

 फिर प्रभु कृपा अनुभव करके, 

यदि भवसागर तुम तर न सके


तुम सत्य तत्व ज्ञानी होकर 

तुम सत्धर्मी, मानी होकर

यदि सरल, निरभिमानी होकर 

कामना विमुक्त विचर न सके


 जग में जो कुछ भी पाओगे

 सब यही छोड़ कर जाओगे 

पछताओगे, यदि तुम अपना

 पुण्यों से जीवन भर न सके


 जब अंत समय आ जाएगा 

 तब क्या तुमसे बन पाएगा?

 यदि शक्ति समय के रहते ही

 आचार विचार सुधर न सके

Monday, June 8, 2026

"भिक्षाम देहि"

 "भिक्षाम देहि!" दरवाजे पर यह आवाज सुनकर नंदी देवी ने जब दरवाजा खोला तो पाया कि सामने 61 वर्षीय लंबी दाढ़ी वाला साधु खड़ा था। उस साधु ने पुनः कहा,"मां! भिक्षाम देहि।"

लगभग 46 वर्ष पहले पिथौरागढ़ बागेश्वर बॉर्डर से, एक 15 साल का किशोर, गांव छोड़कर चला गया था। उसको ढूंढने के सभी प्रयत्न असफल रहे थे। कुछ वर्षों बाद उसके पिता का भी देहांत हो गया था। उसका कुछ कुछ भी पता न चल पाया था।

 वास्तव में बुद्धि बल्लभ उपाध्याय नाम का एक लड़का अपने घर को छोड़कर चला गया था। उसने कुछ समय ट्रकों और दूसरे वाहनों में कुछ मजदूरी की। बाद में वह एक बीकानेर के एक मंदिर में चला गया। वहां उसने नाथ संप्रदाय को अपना लिया। अब उसका नाम बुद्ध नाथ हो गया। अपने गुरु से दीक्षा ली और वहीं रहने लगा। उसने संन्यास को अपना लिया। 4 वर्ष पहले उसके आध्यात्मिक गुरु की भी मृत्यु हो गई थी। मरने से पहले उन्होंने कहा था कि तुम्हारा संन्यास तभी पूर्ण हो पाएगा जब तुम अपनी माता से भिक्षा लेकर आओगे।

आज बुद्धनाथ अपनी माता के सामने खड़ा था। वह झोली फैला कर भिक्षा मांग रहा था। माता को जब सब कुछ पता चला तो उसकी आंख से टप-टप आंसू बहने लगे। उसने अपने बेटे को गले लगा लिया। बुद्ध नाथ ने माता के पैर छुए और उनको कहा कि वह उन्हें भिक्षा दे दें। जिससे कि उनका संन्यास धर्म पूरा हो सके और वह पूरे संन्यासी  बन सके।  

माता ने बहुत अनुग्रह किया कि वह गांव में ही रुक जाए और अपनी माता के पास रहे। लेकिन बुद्ध नाथ ने कहा कि वह संन्यासी बन चुका है और वह गांव में नहीं रहेगा। वह तो बीकानेर के मंदिर में ही रहेगा। हां, अगर कभी माता उससे मिलना चाहती हैं; तो वह बीकानेर के मंदिर में ही आ सकती हैं।

 मां का रो-रो कर बुरा हाल था। इतने वर्षों के बाद पुत्र आया तो वह भी किसी रूप में! लेकिन बुद्ध नाथ के बार-बार भिक्षा मांगने पर माता ने भंडार गृह से थोड़ा अनाज लाकर बुद्ध नाथ की झोली में डाल दिया। बुद्ध नाथ ने वह अनाज अपनी झोली में लिया। फिर विरक्त भाव से वह मुंह मोड़कर वापस चला गया। 

गांव वाले यह सब दृश्य देख रहे थे। उनकी भी आंखों में आंसू थे। परन्तु वे माता को समझा रहे थे, "देख! तेरा पुत्र कितनी महान आत्मा है! वह संन्यासी बन गया; यह तो अपने गांव के लिए बड़ी गर्व की बात है।" 

माता सब कुछ समझ रही थी। लेकिन वह अपने आंसुओं का क्या करें? वे तो किसी भी तरह थम ही नहीं रहे थे।


Tuesday, May 26, 2026

अनुपम उपहार

 महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में एक गांव है बहादरपुरा! वहां के लगभग 3465 निवासियों को एक अनोखा तोहफा विवाह के अवसर पर मिला।

 बहादरपुरा गांव में सांपों के काटने से, बिजली के गिरने से और खेतों में कोई दुर्घटना होने से मौत हो जाया करती थी। जिससे कि परिवार बहुत ही दुखी होते थे। उनकी परेशानी को दूर करने के लिए के उनके पास कोई जीवन बीमा योजना भी नहीं थी। ये घटनाएं घटती ही रहती थी और इनका कोई समाधान भी नहीं था। वास्तव में गांव वाले अगर कोई बीमा योजना ले भी लें तो उनकी किश्त कौन भरे? गांव वाले गरीब थे और उनकी अधिक आय भी नहीं थी। 

पेठकर परिवार के विवाह का समय पास आ रहा था। अनूप पेठकर ने कहा, "क्यों न इस विवाह में हम सभी ग्राम वासियों को एक अद्भुत तोहफा दें!" 

परिवार वालों से विचार विमर्श करने के बाद यह निर्णय हुआ कि सभी ग्राम वासियों को दुर्घटना बीमा अगर दे दिया जाए, तो वे कितने सुखी हो सकेंगे। उपहार का उपहार, और ग्रामवासियों के जीवन में जो खुशियां आएंगी सो अलग!

जयमाला, बैंड बाजे और शानदार भोजन के बाद जो कार्यक्रम था; उसकी तो किसी को उम्मीद ही नहीं थी। लगभग 4500 अतिथि इस विवाह में निमंत्रित थे। अतिथियों के सामने ही अनूप पेठकर ने सबको संबोधित किया, "सभी ग्रामवासी भाइयों। आज बेहद प्रसन्नता का अवसर है। इस अवसर पर मैं सबको एक तोहफा देना चाहता हूं। मैंने पूरे गांव का दुर्घटना बीमा करा लिया है। जिसमें दुर्घटना होने पर ₹100000 मिलेगा।"

जब लोगों ने यह सुना तो उनकी प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा। यह दुर्घटना बीमा 33 करोड़ का था। सभी ग्रामवासी ऐसा शानदार विवाह का तोहफा लेकर बहुत प्रसन्न हुए। सरपंच बलिराम पेट करने तो इसे बहुत अद्भुत तोहफा बताया। 

उसने कहा, "यह शायद इस प्रकार का सबसे पहला तोहफा है। ऐसा तोहफा तो कभी हमारे गांव में किसी ने किसी को नहीं दिया। शादी में लोग मिठाइयां बांटते हैं और तरह-तरह के तोहफे भी बांटते हैं।  परन्तु यह तो सबसे अद्भुत उपहार है। इस परिवार ने तो सबको सुरक्षा का तोहफा दिया है!"

अनूप पेठकर ने हाथ जोड़ते हुए कहा, "हमें तालियां नहीं चाहिए। हमें तो सबकी दुआएं मिल जाएं, वही बहुत है।"

 गांव वाले विवाह के बाद जब घर जा रहे थे तो उनके पास, एक शानदार विवाह की यादगार के साथ-साथ, भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए मिला, एक विश्वास भी था। यह अनुपम उपहार, पूरे एक वर्ष तक उनका साथ देने वाला था।

Thursday, May 21, 2026

त्वचा की सुंदरता

 त्वचा की सुंदरता कई बातों पर निर्भर करती है। जिसमें सबसे प्रमुख बात है; अनुशासन में रहना। अगर आपका पूरा जीवन अनुशासित है तो आपके शरीर के सब अंगों के साथ आपकी त्वचा भी सुंदर रहेगी। वास्तव में त्वचा को सुंदर रखने के लिए बहुत सी बातें अनिवार्य रूप से करनी होती हैं। कई बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना पड़ता है।

तनाव मुक्त रहना:  त्वचा की सुंदरता बनाए रखने के लिए तनाव मुक्त रहना बहुत आवश्यक है। तनाव मुक्त रहने से हमारे शरीर में अच्छे हारमोंस यानी एंडोर्फिंस बनते हैं जो कि त्वचा को चमकदार और झुर्रियों रहित बनाने में मदद करते हैं। तनाव पूर्ण रहने से हमारे शरीर में कॉर्टिसोल नाम का एक हार्मोन बहुत अधिक मात्रा में बनता है जिससे कि त्वचा के कॉलेजन नष्ट होने शुरू हो जाते हैं। इसीलिए आवश्यक है कि हम प्रसन्न चित्त रहें और कोई तनाव अपने मन मे न आने दें।

पर्याप्त नींद लेना:  त्वचा की सुंदरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि हम रात को पर्याप्त नींद लें। अगर हम नींद में कमी करते हैं तो हमारा शरीर त्वचा की टूट-फूट की मरम्मत नहीं कर पाता। इससे त्वचा असमय ही ढीली पढ़नी शुरू हो जाती है। उसकी सुंदरता नष्ट हो जाती है। चेहरे पर सूजन और आंखों के पास काले सर्कल भी नींद की कमी से ही आते हैं।

पर्याप्त पानी पीना:  त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए आवश्यक है कि हम दिन भर में खूब पानी पिएं। अगर हम पानी पीने में कमी करते हैं तो उससे हमारे शरीर में टॉक्सिन इकट्ठे हो जाते हैं। शरीर में विषैले पदार्थ न जमा हों; इसके लिए पानी का काफी मात्रा में पीना बहुत आवश्यक है। इससे त्वचा नम रहती है और चमकदार भी रहती है।

कड़ी मेहनत:  अगर कड़ी मेहनत की जाए; तो उससे शरीर में खून का प्रवाह बहुत अच्छे तरीके से बना रहता है। जिससे कि शरीर भी स्वस्थ रहता है और त्वचा भी।  वास्तव में शारीरिक व्यायाम और परिश्रम करने से त्वचा से खूब पसीना निकलता है। इससे शरीर के सारे विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और त्वचा तरो ताजा हो जाती है। व्यायाम से और मेहनत से खून का दौरा बढ़ता है; जिससे कि पूरे शरीर को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिल जाते हैं और हमारी त्वचा खिली रहती है। इसीलिए आलस को दूर रखकर प्रतिदिन व्यायाम और काम करना चाहिए।

संतुलित भोजन:  भोजन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसमें सारे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हों। इसके लिए सलाद, कच्ची सब्जियां, सूखे मेवे सभी वस्तुओं का पर्याप्त समावेश होना चाहिए। समय पर खाना चाहिए और बहुत अधिक या बहुत कम नहीं खाना चाहिए। उससे भी शरीर तो स्वस्थ रहता ही है और त्वचा की सुंदरता भी बनी रहती है।

आत्मविश्वास:  अपने ऊपर विश्वास रखकर प्रत्येक कार्य करना और कठिन परिस्थिति में भी मुस्कुराते रहना यह भी त्वचा को स्वस्थ रखने का एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है। वास्तव में परेशानियां और कठिन परिस्थितियां तो जीवन का एक अभिन्न अंग हैं। लेकिन आत्मविश्वास से इनका सामना करते हुए, अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी होता है। इससे हमारी त्वचा भी स्वस्थ बनी रहती है। वास्तव में स्वस्थ त्वचा ही तो सुंदर त्वचा होती है। 



Monday, May 18, 2026

केसर

 केसर एक बहुत सुंदर फूल से प्राप्त होता है। फूलों के मादा भाग के ऊपर के हिस्से यानी 'स्टाइल और स्टिग्मा' को ही सुखाकर केसर के रूप में प्रयोग किया जाता है। 

एक फूल से तीन केसर के fibre प्राप्त होते हैं। 1 ग्राम केसर को प्राप्त करने के लिए  कम से कम डेढ़ सौ फूलों का प्रयोग किया जाता है। 

  केसर कम कैलोरी वाला और कोलेस्ट्रॉल से रहित होता है। यह फैट फ्री होता है। इसके अंदर ऐसी घटक होते हैं, जो हमारे मस्तिष्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत बढ़िया माने जाते हैं। डिप्रेशन और अल्जाइमर की बीमारी ठीक करने के लिए भी इसके अंदर अद्भुत कंपोनेंट्स पाए जाते हैं।

 अगर इसे वर्ष में एक बार केवल सर्दी में ले लिया जाए तो पूरे साल भर इसका असर रहता है। इसका अगर गर्म वस्तु के साथ सेवन करें तो यह गर्म तासीर का हो जाता है। और अगर इसका ठंडी वस्तु के साथ सेवन किया जाए तो इसकी तासीर ठंडी हो जाती है। अगर इसे गर्म दूध या गर्म पेय के साथ पिया जाए तो यह गर्मी देगा। लेकिन इसे ठंडाई या ठंडे पेय पदार्थ के साथ लिया जाए तो यह ठंडक प्रदान करेगा। अनुपान भेद से यह केसर ठंडा या गर्म हो जाता है।

 केसर के सेवन से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है। अगर किसी को नींद नहीं आती है तो वे केसर का सेवन कर सकते हैं। खाने की बहुत अधिक इच्छा को कम करने के लिए भी केसर बहुत मदद करता है। इसका सेवन करने से भूख ठीक हो जाती है। आंखों की हेल्थ के लिए भी यह बहुत अच्छा है।  महिलाओं के पीएमएस के इलाज के लिए भी यह अद्भुत दवाई है। 

केसर हमारे देश में काफी मात्रा में पैदा होता हैं। इसके अलावा अरब देशों में और अफ्रीका में भी यह इसका उत्पादन होता है। सैफरन के तीन घटक होते हैं : सैफरानल, क्रोसिन और पिक्रो क्रोसिन। केसर के फूल के मादा हिस्से में ही यह तीनों घटक मिलते हैं।

Safranal: यह एक एल्डिहाइड है। यही सैफरन की भीनी महक के लिए जिम्मेदार होता है। इसकी खुशबू इसी घटक की वजह से आती है। यह घटक अनचाही कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है। लेकिन अच्छी कोशिकाओं की वृद्धि के लिए यह बहुत अच्छा है। यह शरीर में सूजन कम करता है। लिवर कैंसर आदि में भी इसके अच्छे प्रभाव देखने को मिले हैं। लिवर की सूजन भी इससे कम होती है।

Crocin नाम का घटक, केसर को केसरिया रंग प्रदान करता है। हृदय रोगियों को भी इससे बहुत लाभ होता है। कैंसर के रोगियों को जो कीमोथेरेपी होती है; उसके बाद उसमें न्यूरोपैथी होने की संभावना रहती है। इसको रोकने में भी केसर के अच्छे प्रभाव देखने को मिलते हैं।

Picrocrocin  नामक घटक के कारण केसर के स्वाद में थोड़ा कड़वापन होता है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को ज्यादा बढ़ने नहीं देता। यह लिपिड का मेटाबॉलिज्म भी ठीक रखता है। यह मूड को अच्छा रखता है; और दिल और दिमाग की अच्छी तंदुरुस्ती के लिए भी बहुत मददगार है। इससे महिलाओं में पीएमएस की समस्या भी ठीक हो सकती है। 

केसर का प्रयोग हमें गर्मियों में ठंडा रखता है और सर्दियों में गर्म रखता है। इसके केवल दो फाइबर प्रतिदिन लेने से ही बहुत लाभ हो जाता है।

  केसर को 'सनशाइन स्पाइस' भी कहते हैं; क्योंकि यह चेहरे को सूरज जैसा चमका देता है।


Monday, May 11, 2026

सजग राही

ज़िदगी का सफ़र करने वाले

अपने मन का दीया तो जला ले 


 रात लंबी है गहरा अंधेरा

 जाने कब हो यहां पर सवेरा

 तू है अनजान मंजिल का राही

 चलते रहना ही है काम तेरा

 रोशनी से डगर जगमगा ले

अपने मन का दीया तो जला ले


लंबी-लंबी ये जीवन की राहें 

चूमना तेरे कदमों को चाहें 

गहन वन में कहीं खो न जाना

भटक जाएं न तेरी निगाहें 

हर कदम सोच कर तू उठा ले 

अपने मन का दीया तो जला ले

उमा महेश की झांकी

झांकी उमा महेश की, आठों पहर किया करूं।

नैनों के पात्र में सुधा, भर भर के मैं पिया करूं।


वाराणसी का वास हो

और न कोई पास हो 

गिरिजापति के नाम का, सुमिरन भजन किया करूं।


 अंबा कहीं श्रमित न हों

 सेवा का भार मुझको दो

 जी भर के तुम पिया करो, घोट के मैं दिया करूं।


 जी में तुम्हारी है लगन

 खींचते हैं उधर व्यसन

 हरदम चलायमान मन, इसका उपाय क्या करूं?


 भिक्षा में नाथ दीजिए

 अपनी शरण में लीजिए

 ऐसा प्रबंध कीजिए, सेवा में मैं रहा करूं।


 तुम तो जगत के नाथ हो

 सब पर दया का हाथ हो

 मैं ही निराश हो प्रभु, द्वार से क्यों फिरा करूं?