Sunday, August 2, 2026

अनूठा चोर!

 आभूषणों की दुकान में चोरी हो गई थी। लगभग नब्बे ग्राम सोना खो गया था। कोई उसे चुरा ले गया था। सभी खोजबीन कर ली गई थी। सीसीटीवी कैमरे में अच्छी तरह खंगाल कर देख लिया गया था। पुलिस वालों ने भी पूरी तहकीकात कर ली थी। लेकिन चोर का कोई पता न चल रहा था।

 आखिर नब्बे ग्राम सोने के गहने गए तो कहां गए? कोई चोर नहीं आया। नौकरों ने भी गहने नहीं उठाए। गहने किसी को बेचे भी नहीं गए। तो गहने कहां गए? आभूषणों की दुकान का मालिक बहुत परेशान था। बहुत सोच विचार किया परन्तु कुछ भी समझ न आया।

 अचानक एक दिन दुकान के एक नौकर को दुकान के फर्श में एक बड़ा सा सुराख़ नज़र आया। उसे सुराख़ को बड़ी सावधानी के साथ धीरे-धीरे खोदा गया। उसके बाद जो नीचे दिखाई दिया, वह दृश्य बहुत हैरान कर देने वाला था। 

वहां एक चुहिया और उसके छः सद्योजात शावक कागजों के मुलायम बिछौने पर बैठे थे। नब्बे ग्राम सोने के गहने वहीं पर रखे हुए थे। सभी को बहुत हैरानी थी कि चुहिया को गहनों का शौक कैसे हो आया? 

लेकिन वास्तविक बात यह नहीं थी।  चुहिया को गहनों से कोई आकर्षण नहीं था। वह तो गहनों पर लिखी कीमत वाले कागज मुंह में दबा कर ले जाती थी। जिसके साथ गहने पीछे-पीछे खिंचे आते थे। वह उन कागजों को कुतर-कुतर कर अपने बच्चों के लिए बिछौना बना रही थी। इसी तरह वह कई गहने ले गई। सभी गहनों पर जो कीमत लिखा हुआ कागज था; उसे कुतर-कुतर कर उसने बिछौना बना लिया था।

 सभी खोए हुए गहने वहीं पर पड़े हुए थे।  दुकान का मालिक बहुत हैरान हुआ। उसे हंसी भी आ गई। उसने कहा, "हमने तो सोचा था कि किसी चोर ने यह सब गहने चुराए होंगे। चोरी तो हुई, लेकिन वह किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि एक चुहिया ने की। यह तो अनूठी 'सोना चोर' चुहिया है।"

यह सुनकर दुकान के सभी कर्मचारी भी हंस पड़े।