केसर एक बहुत सुंदर फूल से प्राप्त होता है। फूलों के मादा भाग के ऊपर के हिस्से यानी 'स्टाइल और स्टिग्मा' को ही सुखाकर केसर के रूप में प्रयोग किया जाता है।
एक फूल से तीन केसर के fibre प्राप्त होते हैं। 1 ग्राम केसर को प्राप्त करने के लिए कम से कम डेढ़ सौ फूलों का प्रयोग किया जाता है।
केसर कम कैलोरी वाला और कोलेस्ट्रॉल से रहित होता है। यह फैट फ्री होता है। इसके अंदर ऐसी घटक होते हैं, जो हमारे मस्तिष्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत बढ़िया माने जाते हैं। डिप्रेशन और अल्जाइमर की बीमारी ठीक करने के लिए भी इसके अंदर अद्भुत कंपोनेंट्स पाए जाते हैं।
अगर इसे वर्ष में एक बार केवल सर्दी में ले लिया जाए तो पूरे साल भर इसका असर रहता है। इसका अगर गर्म वस्तु के साथ सेवन करें तो यह गर्म तासीर का हो जाता है। और अगर इसका ठंडी वस्तु के साथ सेवन किया जाए तो इसकी तासीर ठंडी हो जाती है। अगर इसे गर्म दूध या गर्म पेय के साथ पिया जाए तो यह गर्मी देगा। लेकिन इसे ठंडाई या ठंडे पेय पदार्थ के साथ लिया जाए तो यह ठंडक प्रदान करेगा। अनुपान भेद से यह केसर ठंडा या गर्म हो जाता है।
केसर के सेवन से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है। अगर किसी को नींद नहीं आती है तो वे केसर का सेवन कर सकते हैं। खाने की बहुत अधिक इच्छा को कम करने के लिए भी केसर बहुत मदद करता है। इसका सेवन करने से भूख ठीक हो जाती है। आंखों की हेल्थ के लिए भी यह बहुत अच्छा है। महिलाओं के पीएमएस के इलाज के लिए भी यह अद्भुत दवाई है।
केसर हमारे देश में काफी मात्रा में पैदा होता हैं। इसके अलावा अरब देशों में और अफ्रीका में भी यह इसका उत्पादन होता है। सैफरन के तीन घटक होते हैं : सैफरानल, क्रोसिन और पिक्रो क्रोसिन। केसर के फूल के मादा हिस्से में ही यह तीनों घटक मिलते हैं।
Safranal: यह एक एल्डिहाइड है। यही सैफरन की भीनी महक के लिए जिम्मेदार होता है। इसकी खुशबू इसी घटक की वजह से आती है। यह घटक अनचाही कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है। लेकिन अच्छी कोशिकाओं की वृद्धि के लिए यह बहुत अच्छा है। यह शरीर में सूजन कम करता है। लिवर कैंसर आदि में भी इसके अच्छे प्रभाव देखने को मिले हैं। लिवर की सूजन भी इससे कम होती है।
Crocin नाम का घटक, केसर को केसरिया रंग प्रदान करता है। हृदय रोगियों को भी इससे बहुत लाभ होता है। कैंसर के रोगियों को जो कीमोथेरेपी होती है; उसके बाद उसमें न्यूरोपैथी होने की संभावना रहती है। इसको रोकने में भी केसर के अच्छे प्रभाव देखने को मिलते हैं।
Picrocrocin नामक घटक के कारण केसर के स्वाद में थोड़ा कड़वापन होता है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को ज्यादा बढ़ने नहीं देता। यह लिपिड का मेटाबॉलिज्म भी ठीक रखता है। यह मूड को अच्छा रखता है; और दिल और दिमाग की अच्छी तंदुरुस्ती के लिए भी बहुत मददगार है। इससे महिलाओं में पीएमएस की समस्या भी ठीक हो सकती है।
केसर का प्रयोग हमें गर्मियों में ठंडा रखता है और सर्दियों में गर्म रखता है। इसके केवल दो फाइबर प्रतिदिन लेने से ही बहुत लाभ हो जाता है।
केसर को 'सनशाइन स्पाइस' भी कहते हैं; क्योंकि यह चेहरे को सूरज जैसा चमका देता है।
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