Monday, May 11, 2026

उमा महेश की झांकी

झांकी उमा महेश की, आठों पहर किया करूं।

नैनों के पात्र में सुधा, भर भर के मैं पिया करूं।


वाराणसी का वास हो

और न कोई पास हो 

गिरिजापति के नाम का, सुमिरन भजन किया करूं।


 अंबा कहीं श्रमित न हों

 सेवा का भार मुझको दो

 जी भर के तुम पिया करो, घोट के मैं दिया करूं।


 जी में तुम्हारी है लगन

 खींचते हैं उधर व्यसन

 हरदम चलायमान मन, इसका उपाय क्या करूं?


 भिक्षा में नाथ दीजिए

 अपनी शरण में लीजिए

 ऐसा प्रबंध कीजिए, सेवा में मैं रहा करूं।


 तुम तो जगत के नाथ हो

 सब पर दया का हाथ हो

 मैं ही निराश हो प्रभु, द्वार से क्यों फिरा करूं?

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