Friday, September 2, 2011

हल्दी (हरिद्राखंड)(turmeric)

हल्दी के गुणों से कोई परिचित न हो ; ऐसा हो ही नहीं सकता . इसमें प्राकृतिक steroids होते हैं . हर प्रकार की एलर्जी इसको खाली पेट सवेरे लेने से ठीक हो जाती है . सर्दी ,ज़ुकाम हो तो कच्ची हल्दी तवे पर भूनकर गर्म पानी के साथ ले लो . कहीं कट जाए तो हल्दी लगा लो . गुम चोट हो तो हल्दी का दूध पी लो . त्वचा में कोई विकार है . तो एक ग्राम हल्दी सवेरे खाली पेट ले लो . कहीं पर गाँठ हो तो हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर गर्म करो और गाँठ पर बाँध लो . रोज़ सवेरे खाली पेट दो या तीन ग्राम हल्दी लेने से शरीर की हर प्रकार की गाँठ खत्म हो जाती है , फिर चाहे वह uterus की हो या स्तन की.  इसे प्रतिदिन लेने से छींकें व हर तरह की allergy भी खत्म होती है .
 Arthritis या सूजन दर्द है तो हल्दी मेथी सौंठ बराबर मात्रा में मिलाकर पांच ग्राम सवेरे खाली पेट ले लो . Kidney में कोई समस्या है तो एक चम्मच हल्दी प्रात: सांय पानी के साथ लो . कैंसर है तब भी इसी प्रकार से हल्दी लो .खांसी है तो हल्दी भूनकर शहद के साथ चाट लो .सवेरे खाली पेट दो ग्राम हल्दी कुछ दिन लेने से भी खांसी ठीक होती है . मसूढ़ों की परेशानी है तो हल्दी सरसों का तेल और नमक मिलाकर हौले हौले मसूढ़ों पर मलो . मुंह से दुर्गन्ध आने पर नमक और हल्दी मिलाकर कुल्ले करो .
 कच्ची हल्दी diabetes और पेट की बीमारी में लाभदायक है . कच्ची हल्दी का घिसकर आँख में अंजन करो तो आँख के infections खत्म होते हैं . त्वचा पर खुजली है ,तो aloe vera के गूदे में हल्दी को मिलाकर अच्छे से मलें . कहीं पर चींटियाँ आ रही हैं तो थोड़ी हल्दी बुरक दें . चूने में हल्दी मिलाने से रोली बन जाती है ; जिसका तिलक माथे पर लगाते हैं .
 इसमें कोई शक नहीं कि हल्दी बहुत शुभता और पवित्रताका प्रतीक है .



Tuesday, August 30, 2011

धतूरा : शिवजी का प्रिय पौधा !(prickly poppy)



 आप जानते हैं न कि धतूरा शिवजी का प्रिय  पौधा है.    वास्तव में यह है ही इतना गुणवाला !                                              
कानों की पीड़ा के लिए ,पत्तों का रस 100 ग्राम 25 ग्राम लहसुन 10 ग्राम नीम के पत्ते  50 ग्राम सरसों के तेल में धीमी आंच पर पकाएं . जब केवल तेल रह जाए, तो छानकर शीशी में भर लें . कान में दर्द हो तो एक दो बूँद टपका दें .
 दमा या साँस की बीमारी होने पर, इसकी सूखी पत्तियां व फल बराबर मात्रा में लें . फलों को कुचल लें. अब दोनों को मिलाकर मिटटी की हंडिया में जला लें. इस राख या भस्म को एक चौथाई ग्राम की मात्रा में शहद के साथ चाटा जाए, तो आशातीत सफलता मिलती है .
                                              धूम्रपान की शुरुआत शायद उपचार के रूप में हुई होगी ; क्योंकि धतूरे के पत्तों की चिलम लेने से दमा का दौरा एकदम शांत होता है. 
जोड़ों में दर्द या सूजन हो तो इसके पत्ते पर तेल लगाकर बांधें . स्तन में गांठ होने पर भी इसका पत्ता बाँध सकते हैं .
                              इसके बीज का तेल सांप के काटने पर और अन्य जतुओं के काटने पर इस्तेमाल होता है . 
पैर के तलुओं पर इसका तेल मलने से नामर्दी का भी इलाज़ किया जाता है. 
सबसे आश्चर्यजनक बात है की इसकी जड़ को कमर में बाँध लेने भर से गर्भपात की समस्या खत्म हो जाती है
            इसमें कोई संदेह नहीं कि धतूरा शिवजी का प्रिय पौधा है!








Sunday, August 28, 2011

yellow berried nightshade (कंटकारी)




यह पौधा कोई उगाना नहीं चाहता , यूं ही उग जाता है . यह कांटेदार जामुनी फूल वाला पौधा बहुत फायदेमंद है . खासकर फेफड़े और गले के रोगों में तो , इसका जवाब ही नहीं . इस पूरे सूखे हुए पौधे को तीन या चार ग्राम के करीब लेकर दो सौ ग्राम पानी में उबाल लें . जब रह जाए एक चौथाई तो छानकर पी लें . यह सवेरे खाली पेट लें . इससे तुरंत खांसी में फायदा होता है . च्यवनप्राश में भी इसे डाला जाता है . अगर दमा या एलर्जी हो तो इस पौधे का ताज़ा रस एक या दो ग्राम लें और शहद में मिलाकर चाटें .
                                      जाड में दर्द हो तो इसका रस रुई में लगाकर जाड के नीचे रखें . इसको पानी में उबालकर उस पानी के कुल्ले करें . epilepsy या migraine में इसका ताज़ा रस दो दो बूँद नाक में टपकायें . यह सवेरे खाली पेट करना चाहिए . दोनों बीमारियाँ बिलकुल ठीक हो जाती हैं .
                                       गंजेपन में या बालों में रूसी हो तब इसका रस बालों की जड़ों में लगाएँ . पेशाब रुक रुककर आता हो तो सूखे पौधे को पांच ग्राम लें और चार सौ ग्राम पानी में उबालें . जब एक चौथाई रह जाए तो खाली पेट पी लें . लीवर में सूजन हो तब भी यही काढ़ा सवेरे शाम लें .
     गर्भावस्था में उलटी आती हों , जी मिचलाता हो या फिर बार बार abortion होने की समस्या हो तो , इसे सूखा पांच छ: ग्राम लेकर उसमें पांच छ: मुनक्का मिलाएं . इसे चार सौ ग्राम पानी में पकाएं . एक चौथाई रहने पर खाली पेट पी लें . और अगर pregnancy नहीं हो पा रही , तो इसकी पांच ग्राम जड़ को चार सौ ग्राम पानी में उबालकर काढ़ा बनायें . इसे period के तीन दिन पहले से शुरू करें ,और लगातार आठ दिन तक लें .
                       खाली जगहों पर बिना उगाये ये बेकार सा दिखने वाला पौधा कितना गुणकारी है !







Thursday, August 25, 2011

घृतकुमारी (aloe vera)



घृतकुमारी का पौधा हमारे जीवन के लिए वरदान है . त्वचा पर झाइयाँ , झुर्रियां पड़ जाएँ तो इसके गूदे की मालिश करने से त्वचा पर चमक आ जाती है . त्वचा जल जाए तो इसके गूदे से ज्यादा बढ़िया इलाज हो ही नहीं सकता . जलन तो तुरंत ही समाप्त हो जायेगी . बहुत जल्दी recovery हो जाएगी और निशान तो पड़ेगा ही नहीं . अगर त्वचा पर कोई पुराना निशान हो या त्वचा सख्त हो गई हो तो इसके गूदे और शहद को उस पर लगाकर तीन चार घंटे के लिए छोड़ दो और फिर धो दो . अगर गठिया (arthritis) की बीमारी है , तो इसके गूदे को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करो और इसका गूदा गर्म करके बांधलो . अगर साथ ही थोडा गूदा खाली पेट खा लिया जाए तो सोने पर सुहागा होगा 
   अगर पाचन ठीक तरह से नहीं हो रहा या लीवर खराब है तो इसे सब्जी या लड्डू बनाकर खाएं ; या फिर इसका गूदा खाली पेट खा लो . E S R ज्यादा है तब भी यह बहुत मददगार है . इसके एक लिटर गूदे में पचास ग्राम काला नमक डालो और दस ग्राम काली मिर्च . फिर 60 ml निम्बू का रस मिलाकर कांच के  मर्तबान में रखकर दस-पन्द्रह दिन धूप में रखो . यह स्वादिष्ट गूदा एक चम्मच सवेरे शाम लेते रहने से liver ठीक रहता है .शुगर की बीमारी में इसका गूदा लेते रहने से फायदा होता है . इसी से कुमारीआसव  बनाया जाता है . यह पेट के लिए लाभदायक है. ulcer या कब्ज़ होने पर इसके रस में एरंड का तेल डालकर ले लें
                              सिरदर्द होने पर माथे पर इसका लेप कर लो . अगर माईग्रेन की समस्या है तो साथ में मेधावटी भी सवेरे शाम ले लो . इसे खाने से और सर और माथे पर लेप करने से आँखों की रोशनी भी बढ़ती है . ऑंखें मूँद कर इसके गूदे को रूई में लगाकर एक दो घंटे के लिए पलकों पर रखकर पट्टी बांध लो . इससे आँख के सभी रोग दूर होंगे और आँखों की रोशनी भी बढ़ेगी . बाल सफ़ेद हो रहे हैं तो इसका गूदा खाइए और साथ में सिर पर लेप कीजिये-- इसका गूदा ,भृंगराज ,दही और मुल्तानी मिटटी को मिलाकर. बस फिर चमत्कार देखिये और प्रसन्न हो जाइए  गंजे भी इसके गूदे को सिर पर नियमित रूप से लगाएँ , तो निश्चित रूप से फायदा होगा .
                        इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढती है . हर तरह की सूजन में इसका लेप फायदा करता है. इसको नियमित रूप से लेने पर रक्तअल्पता (anemia) की बीमारी ठीक होती है . इसके गूदे को खाने से शरीर के हारमोन भी संतुलित रहते हैं . यदि पीरियड के दौरान अधिक bleeding हो तो प्रात:काल 20 ग्राम गूदे में 3 ग्राम गेरू का पावडर मिलाकर ले लो . छोटे से बच्चे को motion नहीं आ रहा हो तो इसके गूदे में हींग भूनकर मिला लो और बच्चे की नाभि के आसपास लगा दो . यदि पेट में दर्द या अफारा हो तो इसका बीस ग्राम गूदा ले सकते हैं .
                                 इसको प्रयोग करने से कैंसर में भी लाभ देखा गया है .खांसी में इसका टुकड़ा लेकर गर्म करें , फिर उसपर काली मिर्च और काला नमक लगाकर खाएं . स्तन में गाँठ होने पर इसको एक तरफ से छीलकर गर्म करके बाँध लें . कमर दर्द , slip disc या sciatica की परेशानी हो तो इसका गूदा आटे में गूंधकर रोटी खाओ . इसका गूदा लेने सेबच्चों की allergy भी ठीक हो जाती है. 
                         बच्चे बिस्तर में पेशाब करते हों तो भुने काले तिल , गुड और घृतकुमारी को मिलाकर लड्डू बनायें और बच्चों को खिलाएं . ये लड्डू prostrate gland बढ़ने पर भी लिए जा सकते हैं .
                     खुजली या शीत पित्त होने पर घृतकुमारी, नारियल तेल , कपूर और गेरू का शरीर पर लेप करके रखें और कुछ देर बाद नहा लें. 
                       सर्दी , जुकाम हो या food poisoning हो जाए ; किसी प्रकार की एलर्जी हो या लीवर की समस्या हो, यह सभी में मदद करता है. यह हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं की वृद्धि करता है. इसमें ऐसा घी है, जो हमें हमेशा कुमार या कुमारी रखता है. तभी तो इसका नाम घृतकुमारी है !


                                               
              


Wednesday, August 17, 2011

एक आह्वान गीत

मैंने यह आह्वान गीत सुना . प्राणों में शक्ति का संचार कर देता है :



धरती की शान,
तू है मनु की संतान 
तेरी मुट्ठियों में बंद तूफ़ान है रे 
मनुष्य तू बड़ा महान है रे 

तू जो चाहे पर्वत पहाड़ों को तोड़ दे 
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड़ दे 
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे  
तू जो चाहे धरती से अम्बर को जोड़ दे 
तू है शक्तिमान 
पवन सा गतिमान 
तेरी नभ से भी ऊंची उड़ान है रे 
मनुष्य तू बड़ा महान है रे 

धरती सा धैर्य तुझमें सूरज सा तेज 
तू जो चाहे तो तूफां को थाम ले 
पापों का वेग रुके, पशुता का शीश झुके 
तू जो अगर हिम्मत से काम ले 
अमर तेरे प्राण 
मिला तुझको वरदान 
तेरी वाणी में युग का आह्वान है रे 
मनुष्य तू बड़ा महान है रे 



प्यारा सा भजन

ये भजन मुझे बहुत प्रिय है....


सांसों का क्या भरोसा       
रुक जाएँ  कब कहाँ पर 
प्रभु का तू नाम जप ले 
यही आसरा यहाँ पर 
     मत हँस कभी किसी पे 
     न सता कभी किसी को 
     क्या जाने कल को तेरा
      क्या हाल हो यहाँ पर
जो हंस जैसा जीवन 
चाहता है ए बशर तू 
चुन ले गुणों के मोती 
बिखरे जहाँ जहाँ पर 
         कर कर्म इतना ऊंचा 
         कि बुलंदियों को छू ले 
         इज़्ज़त से नाम तेरा
         आ जाए हर ज़ुबां पर     

Saturday, August 13, 2011

आपका दोस्त अरंड (castor) !

                                                                                                               अरंड का पेड़  बहुत लाभदायक  है.                                                           हाथ पैर में सूजन हो या घुटनों में दर्द , बस इसका एक पत्ता गरम करके रात को बाँध लो. अगर पत्ते पर अरंड का तेल लगा लिया जाए तो और भी बेहतर है . हर तरह  का दर्द   सूजन इसका पत्ता सोख  लेता है . आँख  में कुछ  पड़ जाए  तो एक दो  बूँद  आँख में डालने पर वह आंसुओं के साथ बाहर आ जाएगा . यह निरापद है.  पत्तों  को पीसकर  आँख पर बांधलें . पलकों पर लुगदी की टिक्की रखकर पट्टी बाँध लें . आँख की लालिमा व जलन समाप्त हो जायेगी .
                    स्तन  कैंसर में  अरंड  के तेल  की मालिश करने से फायदा होता है. स्तन  की गाँठ पर इसका पत्ता बांधें  . एक पत्ता 200 ग्राम  पानी में उबालें जब  50 ग्राम बचे  तो पीयें . यह सवेरे खाली पेट लें. इससे स्तन कैंसर ठीक होता है. त्वचा  फटे  या त्वचा पर काले धब्बे हों, तो  इसके तेल की मालिश करने से त्वचा बिलकुल ठीक हो जाती है
गर्भिणी  स्त्री या नव  प्रसूता  के स्तनों  पर इसकी  गिरी को पीसकर लेप किया जाए तो  गांठें नहीं पड़ती और दूध भी अधिक आता है.Nipple अगर crack हो जाए तो इसका तेल लगा लेना सर्वोत्तम इलाज है . गर्भिणी स्त्री को अगर पीलिया हो जाए तो इसके 5 ग्राम पत्तों का रस  या  काढ़ा ले  सकती है . वैसे भी पीलिया में पांच दिन तक इसके पत्तों का रस आधा कप खाली पेट ले लिया जाए तो पीलिया बिलकुल ठीक होता है .
                              पेट  दर्द में  पानी  में 2 चम्मच  तेल  और  नीम्बू लिया जा सकता है .पेट दर्द तो खत्म होगा ही ,साथ ही यह आँतों  को शक्ति  भी देता है . दूध में मुनक्का उबालकर  और उसमें अरंडी का  तेल एक चम्मच डालकर सोने से पहले लिया जाये तो कब्ज़ भी नहीं रहता और आंतें भी मज़बूत होती हैं .
                                     amoebisis  में भी इसके तेल का प्रतिदिन सेवन किया जाए तो लाभ होता है . appendix  की परेशानी हो या सूजन हो तो एक या दो चम्मच तेल रात को दूध में डालकर पीयें . पेट में  कीड़े हों तो थोडा गुड खाकर बीस मिनट बाद इसके पत्तों का 5 ग्राम रस पी लें . pin worms  हों तो पत्तों का रस anus पर लगायें .  ascities  (जलोदर) की बीमारी में   पेट   फूल जाता है. इसमें अरंड के पंचांग (पाँचों अंग ) बीस ग्राम लेकर पचास ग्राम गोमूत्र में पकाएं . जब आधा रह जाए छानकर सवेरे खाली पेट पिएँ.
                                                      मोटापे में पेट की चर्बी घटानी हो तो अरंड की बीस ग्राम जड़ दो सौ ग्राम पानी में पकाएं . जब एक चौथाई रह जाए तो पी लें. जादू का सा असर होगा ;लेकिन करना नियमित रूप से होगा. मासिक धर्म की पीड़ा में इसके एक पत्ते को दो सौ ग्राम पानी में पकाएँ. जब रह जाए पचास ग्राम; तो पी लें. उबलते समय अजवायन भी डाल दें तो अच्छा रहेगा . पेट पर इसका पत्ता गर्म करके बाँध लें , तो  दर्द बिलकुल ही समाप्त हो जाएगा 
           आपको हैरानी होगी कि जो bedsore किसी भी तरह ठीक नहीं होने में आते , वो इसका तेल लगाते रहने से कितनी जल्दी अच्छे हो जाते हैं. कितना अद्भुत है यह अरंड का वृक्ष ! अपने आस पास लगाइए न इसे ! आपसे पक्की दोस्ती निभाएगा .