मकान धूं धूं करके जल रहा था। आसपास सभी इकट्ठे हो रहे थे। "अरे भाई! फायर ब्रिगेड को फोन करो।" किसी ने आनन फानन में फायर ब्रिगेड को फोन लगाया। दस मिनट के अंदर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आ गईं और तुरंत आग बुझाने का प्रयत्न प्रारंभ हो गया।
यह मकान एक जज साहब का था। अचानक ही उसमें आग लग गई थी और पूरा घर जल रहा था। बहुत प्रयत्न करने के बाद आग को काबू में लाया गया।
आग बुझाने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने मकान के सभी सामान को सावधानीपूर्वक हटाना प्रारंभ किया।
जैसे ही वह अंदर के कमरे में घुसे तो भौचक्के रह गए। वहां हैरान कर देने वाला नजारा था। कमरे में नोटों से भरी हुई बोरियां थीं। जिन में करोड़ों की संख्या में नोट थे। अधजले नोटों के बंडल से बोरियां ठसाठस भरी हुई थीं। अधिकतर नोट पानी गिरने की वजह से भीग भी गए थे।
"अरे जज साहब तो न्याय करते हैं! वे तो बहुत ईमानदार न्यायाधीश हैं। उनके पास इतनी नगदी?" हैरान होकर सभी सोच रहे थे।
कुछ महीनों बाद समाचार पत्र के मुखपृष्ठ पर जज साहब के जेल जाने की खबर छपी थी।
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