Monday, October 6, 2014

मानसिक बीमारियाँ (mental diseases)

तनाव , अनिद्रा , अवसाद , सिरदर्द, चक्कर आना , माइग्रेन आदि मस्तिष्क से सम्बंधित कुछ ऐसी बीमारियाँ हैं ; जिनसे छुटकारा पाने का उपाय व्यक्ति को सरलता से नहीं मिलता ।  इन बीमारियों के लिए कुछ जड़ी- बूटियाँ बहुत उपयुक्त है :

सर्पगंधा ; यह इतना अच्छा पौधा है की इसका extract निकालकर  आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी मानसिक बीमारियों के लिए इसका प्रयोग किया जाता है । उन्माद ,तनाव व अवसाद जैसी बीमारियों के लिए इसका निर्भयतापूर्वक प्रयोग किया जा सकता है । इसकी जड़ का पाउडर  1/2 ग्राम - 1 ग्राम तक प्रात: सायं लिया जा सकता है । इससे hyperactivity ठीक होती है । तनाव से मुक्ति मिलती है 
\ इसका प्रयोग लम्बे समय तक नहीं करना चाहिए  नहीं तो इसकी आदत पड जाती है ।   नींद ठीक से न आये तो रात को  1-2 ग्राम सर्पगंधा की सूखी पत्तियां दूध या पानी के साथ लें ।  अगर नींद न आती हो तो सर्पगंधा और जटामासी बराबर मात्रा में मिलाकर 1-2 ग्राम की मात्रा में सवेरे शाम लें ।  जब ठीक नींद आने लगे तो यह लेना बंद कर दें ।        
Epilepsy की बीमारी में सर्पगंधा +जटामासी +अश्वगंधा +गाजवान+सौंफ को बराबर मात्रा में मिलाकर एक एक चम्मच सवेरे शाम लें   

मकोय ( black nightshade);      अगर नींद न आये तो इसकी 10 ग्राम जड़ का काढ़ा लें । अगर साथ में गुड भी मिला लें तो नींद तो अच्छी आयेगी ही साथ ही सवेरे पेट भी अच्छे से साफ़ होगा ।। 

मालकांगनी (ज्योतिष्मति ) ; दिमाग की एकाग्रता (concentration)  बढ़ाने के लिए , memory power बढ़ाने के लिए और बुद्धि को तेज़ करने के लिए इससे बढ़िया और कोई बूटी नहीं है । इसके बीज 1 से 3 की मात्रा में प्रतिदिन सवेरे खाने से याददाश्त बढ़ती है , बुद्धि तीक्ष्ण होती है । ऋषि दयानंद जैसे महापुरुष भी इसका सेवन करते थे । 
इसका तेल भी मिलता है । इसके बीजों का 2-4 बूँद तेल सवेरे दूध में डालकर पीने से बुद्धि बढ़ती है । स्मृति बढ़ती है \ migraine और fits के लिए तो यह रामबाण है । अमृत है । नींद कम होती हो तो माथे और सिर में इसके तेल की मालिश करनी चाहिए । 
दौरे  पड़ते हों या memory loss हो रहा हो तो इसका प्रयोग करना चाहिए । विशेष तौर पर 50 - 60 वर्ष के होने पर  memory loss महसूस होता है । तब इसका प्रयोग कर सकते हैं । 
यह लम्बे समय तक ली जा सकती है ; परन्तु मात्रा कम ही रखनी चाहिए ।

ब्राह्मी : इसके एक या दो पत्ते खाने से ही  तीक्ष्ण होती है और याददाश्त बढ़ती है । कहा जाता है की सभी बड़ी उम्र के नेता ब्राह्मी का प्रयोग करते हैं ।

शंखपुष्पी  और जटामासी  मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारियों को दूर करने में सहायक हैं ।

अश्वगंधा के नित्य प्रयोग से शरीर के साथ ही मस्तिष्क को भी शक्ति मिलती है ।

अगस्त्य ( sesbania)  ;    इसके फूलों को बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर कांच के बर्तन में रख दें ।  तीन चार दिन धूप दिखा दें .। बस बन गया इसका गुलकंद ! इसे लेने से एकाग्रता बढती है ।  यह दिल और दिमाग के लिए अच्छा है ।  विक्षिप्तता की स्थिति को भी यह ठीक कर देता है ।     मूर्छा होने पर इसके पत्तों के रस की बूँदें नाक में डालें |

शिरीष  ;   यह विषनाशक होता है |  सर्प आदि के काटने पर अगर नीम और शिरीष के पत्तों के पानी में नमक डालकर झराई करें तो कहते हैं कि चेतना लौट आती है |  इसके फलियों के बीजों को बकरी के दूध में पीसकर नाक में सुंघाने से मूर्छा खत्म हो जाती है |   
उन्माद की बीमारी में मुलेठी +सौंफ +अश्वगंधा +वचा +शिरीष के बीज ;  इन सबको मिलाकर 1-1 चम्मच सुबह शाम दें ।

धातकी , धाय (woodfordia) ;   इसके फूल व् पत्तियों का काढ़ा लें , या केवल फूलों का शर्बत लें ।  इसके सूखे फूलों का पावडर भी लिया जा सकता है ।  इससे दिमाग को ताकत मिलती है ।  यह पौष्टिक तो होता ही है । 

गुलदाउदी (chrysanthemum)  ;   गुलदाऊदी या सेवती के फूल बहुत सुन्दर होते हैं ।  छोटे फूलों वाली गुलदाऊदी के औषधीय गुण अधिक होते हैं ।  इससे घर का वातावरण भी अच्छा होता है ।  घर में इसके दो तीन पत्तों पर देसी घी लगाकर कच्चे कोयले पर जलाएं तो नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है, अशांत मन शांत होता है ।    

मकोय (black nightshade)  ;   अगर नींद न आये तो इसकी 10 ग्राम जड़ का काढ़ा लें । अगर साथ में गुड भी मिला लें तो नींद तो अच्छी आयेगी ही साथ ही सवेरे पेट भी अच्छे से साफ़ होगा । 

दूब (grass )  ;  अगर तनाव हो तो दूब पीसकर पैरों में लगायें । 

अकरकरा  ;     मिर्गी के दौरे पड़ते हों तो , इसके फूलों का पावडर और वचा का पावडर मिलाकर लें ।   

शतावर (asparagus) ; अनिंद्रा की बीमारी में इसकी जड़ का 10 ग्राम पावडर दूध में खीर की तरह पकाएं ।  फिर थोडा सा देसी घी डालकर रात को सोते समय ले लें । अच्छी नींद आयेगी ।   

तुलसी (holi basil) ; स्मरणशक्ति बढानी  हो  तो इसकी चार-पांच पत्तियां पीसकर शहद के साथ लें ।  

ज्योतिष्मति (celastrus) ;  इन्ही फलों से निकले हुए बीजों से सात्विक बुद्धि बढ़ती है , एकाग्रता बढ़ती है और memory बढ़ती है । स्वामी दयानन्द सरस्वती भी इसका एक बीज प्रतिदिन लेते थे ।  माइग्रेन , या सिरदर्द हो या भयंकर दौरे पड़ते हों ; तो इसके 2-3 बीज तक ले सकते हैं । सवेरे सवेरे खाली पेट बीज खाकर दूध या पानी पी लें ।  मिर्गी में इसके बीज लेने के साथ साथ इसके बीजों के तेल की सिर में और माथे पर मालिश करें ।  स्मृति बढानी है तो , इसके तेल की 2-4 बूँद दूध में डालकर पीयें ।  नींद कम हो , तनाव रहता हो तो , इसके तेल की सिर में मालिश करें ।  केश तेल में इसका भी तेल मिला लें .छोटे बच्चों के सिर और माथे पर इसके तेल की मालिश करनी चाहिए।  60-70 वर्ष की अवस्था के पश्चात याददाश्त कुछ कम होनी प्रारम्भ हो जाती है । तब तो इसके एक या दो बीजों का सेवन अवश्य ही शुरू कर देना चाहिए । ब्राह्मी , शंखपुष्पी आदि के साथ इसे भी मेधावटी में डाला जाता है ।  
यह कुछ गर्म होती है अत: एक साथ बहुत अधिक सेवन नहीं करना चाहिए ।

 बथुआ (chenopodium) ;  इसका 10-15 ग्राम रस सवेरे शाम लिया जा सकता है ।  यह बुद्धिवर्धक है ।   

सफ़ेद प्याज (white onion)  ;  हिस्टीरिया या मूर्छा हो तो इसका रस नाक में डालें । 

सेमल (silk cotton tree) ;  सेमल की रुई तकियों में भरी जाती है ।  इसकी रुई के तकिए से अच्छी नींद आने में मदद मिलती है ।  

पीपल (sacred fig)  ;  हिस्टीरिया के मरीजों को इसके पत्तों का रस पिलाने से लाभ होता है ।  

खीरा (cucumber)  ; खीरे को संस्कृत में सुशीतल भी कहा जाता है ।  यह दिमाग को ठंडक देता है ।  यदि तनाव हो तो खीरा कटकर आँखों पर रख लें और इसे पीसकर माथे पर लगा लें ।  पूरे सिर में भी लगा लें तो और भी लाभ करता है । .नींद कम आती हो तो खीरे के बीज का पावडर शाम को लें और माथे पर खीरा रगड़ें ।  मानसिक तनाव , मानसिक रोग या अवसाद की बीमारी हो तो इसके बीजों के साथ ब्राह्मी , शंखपुष्पी, बादाम और काली मिर्च का शरबत बनाकर पीयें । 

कंटकारी , कटैली (yellow berried nightshade)  ;   epilepsy या migraine में इसका ताज़ा रस दो दो बूँद नाक में टपकायें ।  यह सवेरे खाली पेट करना चाहिए ।  दोनों बीमारियाँ बिलकुल ठीक हो जाती हैं । 

भाँग (cannabis)  ;   हिस्टीरिया के दौरे पड़ते हों तो भांग में थोडा हींग मिलाकर मटर के बराबर गोली सवेरे शाम लें । सिर दर्द ठीक करने के लिए भांग के पत्तों की लुगदी को सूंघें । इसके पत्तों के रस की दो -दो बूँद नाक में डालें या इसके पत्तों का  पावडर सूंघें।इससे भी सिर दर्द ठीक हो जाता है ।
 नींद न आती हो या दौरे पड़ते हों तो , ब्राह्मी , शंखपुष्पी ,सौंफ और भांग बराबर मात्रा में लेकर , एक एक चम्मच सवेरे शाम लें ।  migraine होने पर ये चूर्ण भी लें तथा भांग पीसकर माथे पर लेप करें ।  इसका पावडर रात को सूंघने मात्र से ही अच्छी नींद आती है । 
 नींद न आती हो तो 5 ग्राम भांग के पावडर में 1-2 ग्राम सर्पगन्धा का पावडर मिलाकर रात को सोते समय लें ।  हिस्टीरिया में भी इसका पावडर लाभ करता है ।     

मेंहदी (henna )  ;  अगर मूर्छा आती हो , तो कुछ पत्तों का शरबत तुरंत पीयें ; आराम मिलेगा । 
पवित्रता और सुन्दरता से भरे इस फूल में दैवी गुण विद्यमान हैं ।  इसकी माला धारण करने मात्र से मन की प्रसन्नता बढ़ती है ।    इसे घर में लगाने से वास्तुदोष समाप्त होते हैं और ग्रहों की शान्ति होती है ।  

देसी गुलाब (rose)  ;   Stress हो या नींद न आती हो , या फिर मानसिक थकावट हो ; सिरहाने के पास इसका गुदस्ता रखकर सोयें . फिर देखिये परिणाम ! इसके फूल की पंखुडियां तकिये के नीचे रखकर सोयें ।  इसका पौधा सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को भगाता है ।    चन्दन को गुलाबजल में घिसकर माथे पर लगाने से मस्तिष्क को आराम मिलता है . Migraine तक अच्छा होता है । 

अनार (pomegranate)  ;  यदि अनिंद्रा या टेंशन है तो इसकी 2-3 ग्राम कोमल पत्तियों को कुचलकर 200 ग्राम पानी में काढ़ा बनायें और सोने से पहले ले लें ।        

पलाश (flame of the forest )  ;  नींद कम आने पर इसके बीज के पावडर में मिश्री मिलाकर 1-1 चम्मच सवेरे शाम लें । 

सहदेवी  ;   सहदेवी का पौधा नींद न आने वाले मरीजों के लिए सबसे अच्छा है ।  इसे सुखाकर तकिये के नीचे रखने से अच्छी नींद आती है ।  इसके नन्हे पौधे गमले में लगाकर सोने के कमरे में रख दें ।  बहुत अच्छी नींद आएगी ।  

ब्राह्मी  ;  बुद्धि को तीव्र करने या याददाश्त को बढ़ने के लिए लेना हो तो ,सवेरे 4-6 इसकी पत्तियां चबा-चबाकर खाएं।  फिर पानी पी लें।  इससे मन शांत होता है।  एकाग्रता भी बढ़ती है। पत्ते थोड़े कडवे होते हैं। अत: इसके सूखे पत्ते 250 ग्राम +बादाम 250 ग्राम +काली मिर्च 20 ग्राम +500 ग्राम मिश्री ; इन सबको मिलाकर रख लें और इस मिश्रण का एक- एक चम्मच सवेरे शाम लें। 
      मिर्गी , उन्माद , मंदबुद्धि या over activity की शिकायत हो तो इसके पौधे का पंचांग सुखाकर सवेरे शाम लें। नींद कम हो तो 2-3 ग्राम के मात्रा दूध में पकाकर लें . उन्माद होने पर 10 ग्राम ब्राह्मी +5 ग्राम कूठ , दोनों मिला लें।  इस मिश्रण को 2-2 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम शहद के साथ चटायें। 

अश्वगंधा   ;  अश्वगंधा की जड़ का पावडर मस्तिष्क  के लिए बहुत अच्छा है ।  

अर्जुन  ;   इसकी 10-15 ग्राम ताज़ी छाल 200-300 ग्राम पानी या दूध में उबालकर सवेरे शाम लेने से लाभ होता है।  ताज़ा न मिले तो इसकी छाल का 5 ग्राम पावडर डेढ़ गिलास पानी में पकाएं। जब आधा गिलास रह जाए , तो पी लें।  इस  काढ़े  से घबराहट , बेचैनी , नींद टूटना जैसी बीमारियाँ भी ठीक होती है।  

रतनजोत (onosma)  ;  सिर में लगाने वाले तेल में अगर रतनजोत के कुछ टुकड़े ड़ाल दिए जाएँ तो तेल का रंग तो सुंदर हो ही जाता है ; इस तेल के प्रयोग से बाल स्वस्थ और काले हो जाते हैं।  साथ ही इस तेल से मस्तिष्क की ताकत भी बढ़ती है। 
इसको घिसकर माथे पर लगाने से मानसिक क्षमता बढ़ती है और डिप्रेशन आदि बीमारियाँ नहीं होने पाती।   
      इसके पौधे की जड़ का पावडर एक ग्राम सवेरे शाम लिया जाए तो , मिर्गी के दौरे पड़ने बंद हो जाते हैं।  

ये सभी जड़ी बूटियाँ प्राप्त करने में कठिनाई हो तो मेधावटी का प्रयोग करें । इसमें इन सभी जड़ी बूटियों की उचित मात्रा होती है |



Thursday, October 2, 2014

पेट के रोग (stomach diseases)

पेट के रोग व इससे जुडी अन्य बीमारियाँ  विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियों से ठीक हो सकती हैं । आम तौर पर आस पास ही  मिलने वाले पेड़ पौधों के प्रयोग से  पेट की कई समस्याओं का निदान हो सकता है ।

पीपल ; पीपल के पके हुए पत्तों को कूटकर उसे चाय की तरह पीएँ तो पेट में आराम आता है । इन पत्तों के साथ गुलाब की पत्तियां और मुलेठी को भी चाय में डाला जा सकता है । इसके प्रयोग से आँतों के घाव , अल्सर आदि भी ठीक होते हैं । शरीर के विजातीय तत्व(toxins) भी बाहर निकल जाते हैं । आँतों में bleeding होती है ; तब भी पीपल के पत्तों का काढ़ा लाभकारी रहता है । पीपल की पत्तियां डंठल समेत कूटकर , रस निकालकर पीने से आँतों का घाव भर जाता है । आँतों की सूजन और infection भी ख़त्म हो जाता है । 

अमरुद ; अपच , गैस, कब्ज़ व पेट की अन्य सभी बीमारियाँ ख़त्म हो सकती हैं; यदि अमरुद का नियमित सेवन किया जाए । जिनको अपच(indigestion) की शिकायत है वे अमरूद का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं । जिनको अतिसार या दस्त लगने की शिकायत है ; वे अमरुद के पत्ते +अमरुद की छाल और आधा ग्राम सौंठ मिलाकर काढ़ा बनाकर पीयें । इस काढ़े से liver सम्बन्धी बीमारियों में भी आराम मिलेगा । अमरुद की कोमल पत्तियों को छाया में सुखा लें । इसे मोटा मोटा कूट लें । इसमें 1 -2 पत्तियां तुलसी की मिला लें । मरुआ ,मुलेठी , काली मिर्च, लौंग अदरक आदि भी मिला सकते हैं । इस चाय का नियमित प्रयोग करने से पेट व  शरीर की अन्य बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है । इस चाय का स्वाद भी बहुत अच्छा होता है और उसमे भीनी भीनी खुशबू भी आती है । 
बच्चों को दस्त लग जाएँ तो अमरूद की जड़ का छिलका 2 -5 ग्राम की मात्रा तक पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पिला सकते हैं । अमरुद में नमक डालकर खाते रहने से पेट के कीड़े मर जाते हैं । 

सफेद प्याज ; प्याज के पत्तों की चटनी पीसकर नियमित रूप से कुछ दिनों तक खाने से पाचन क्रिया ठीक हो जाएगी । पेट में दर्द होने पर प्याज के रस में थोड़ा हींग मिलकर पेट पर लगाने से आराम आता है । पेट में अफारा होने पर प्याज के रस में थोड़ा हींग और सेंधा नमक मिलकर लेने से एकदम आराम आता है । 
खूनी बवासीर में प्याज के रस में मिश्री मिलकर पीएँ । इससे बवासीर में जल्द ही आराम मिल जाएगा । 

विधारा ; अल्सर के रोगियों के  विधारा के पत्ते बड़े लाभकारी हैं । खूनी दस्त लगने पर अगर खून रुक ही नहीं रहा है तो 2 -3 विधारा के पत्तों को कूट लें इसमें पानी मिलाकर एक कप बना लें इसे छानकर मिश्री मिलकर पीयें । इसे नियमित रूप से लेने पर आराम होगा । ulcerative colitis में भी यह प्रयोग लाभकारी है ।  रस से अंदर अंदर के घाव भर जाते हैं ।

मालती ; इसके फूल व पत्तों का रस निकालकर पीने से आँतों की कमजोरी व पेट के रोगों में लाभ होगा । भूख कम लगने पर यह पौधा बड़ा सहयोग करता है । अगर digestive juices कम निकल रहे हों तो इसके रस को लेने से लाभ होगा । यह रस छोटे बच्चों को भी दिया जा सकता है ।

भाँग ; जिनको amoebisis , colitis आदि हो , बार बार शौच जाना पड़ता हो तो भांग बहुत ही लाभकारी है । इसके लिए 100 ग्राम पकी हुई बेल का सूखा गूदा ,+ 20 ग्राम भांग + 30 ग्राम सौंफ मिलाकर , पाउडर करके रखें । इसे सुबह शाम ताज़े पानी के साथ लें । पेट के लिए, आँव आदि के लिए , यह पाउडर बहुत लाभकारी है । यह भूख को भी बढाता है । जिनको भूख कम लगती हो , वे काली मिर्च और भांग के चूर्ण को अदरक के रस में घोटकर , चने के बराबर गोली बनाकर सेवन करें । इससे पाचन क्रिया भी ठीक होगी ।

मुलेठी ; मुलेठी का काढ़ा लेने से पेट की सभी समस्याएँ ठीक होती हैं ।

अपराजिता ; यह पेट के लिए लाभदायक है लेकिन थोड़ी विरेचक हो सकती है । अत: इसका थोड़ी कम मात्रा  में प्रयोग करना चाहिए । कब्ज़ लिए बहुत उपयोगी है ।

पित्त पापड़ा ; भयानक acidity की समस्या है , तो पित्त पापड़ा की कुछ पत्तियां चबा लो । एकदम आराम आएगा । इसकी पत्तियां चबाकर पानी पी लें । इससे आँतों के घाव भी ठीक हो जाते हैं । बच्चों के पेट में कीड़े हो गए हैं तो पित्त पापड़ा का सूखा पाउडर लेकर इसमें वायविडंग का पाउडर बराबर मात्रा में मिलाएं । 1 -1 ग्राम की मात्रा में बच्चों को यह दें । इससे पेट के कीड़े तो खत्म होंगे ही ; पेट भी साफ़ होगा । आँतों का इन्फेक्शन भी खत्म होगा । बड़े 2 -2 ग्राम की मात्रा में इस पाउडर को ले सकते हैं । केवल पित्त पापडे को सुखाकर उसका पाउडर लेना भी लाभकारी रहता है । इसका कोई भी side effect नहीं है ।
विदेशों से आने वाले लोग जब भारत में आते हैं तो उन्हें खाने पीने में पेट में कुछ परेशानी महसूस हो सकती है । लेकिन पित्त पापड़ा का पाउडर लेते रहें तो कोई दिक्क्त नहीं होगी बल्कि पाचन भी ठीक हो जाएगा ।

पिया बासा ; अगर दस्त लगे हुए हैं तो पिया बासा का 2 -3 चम्मच रस 1 ग्राम सौंठ (dry ginger) में मिलकर लें । दस्त में आराम आएगा । इसके रस से blood dysentery , आँतों या liver की सूजन में भी आराम आता है ।
इसका पंचांग + सौंठ + अश्वगंधा की जड़ मिलाकर, काढ़ा बनाकर, लेने से आँतों की सूजन खत्म होती है , कमजोरी दूर होती है और dysentery भी ठीक होती है ।
भयानक एसिडिटी हो तो इसका 2 चम्मच रस पानी मिलाकर पी लें । इससे आँतों का infection भी ठीक होगा ।

पलाश (ढ़ाक) ; इसके 5-10 ग्राम फूल आधा लीटर पानी में रात को मिटटी के बर्तन में भिगो दें । सवेरे मसलकर , छानकर , पीयें । इससे शरीर के अंदर की गर्मी दूर होती है । पेट ठीक रहता है और ulcer इत्यादि नहीं होते ।
इसकी फलियाँ कृमिनाशक होती हैं । इसके बीजों को पानी में उबालकर छिलका उतारकर पाउडर करके रख लें । बच्चों के पेट में कीड़े होने पर , पहले थोड़ा गुड खिला दें । बाद में इसके बीजों का पाउडर थोड़ा सा दे दें ।
इसकी जड़ के छिलके का काढ़ा अतिसार (dysentery), ulcerative colitis आदि को ठीक करता है ।

ककड़ी ; अगर आँतों में infection हो , या acidity की समस्या हो तो 4 ग्राम मुलेठी + 1ग्राम ककड़ी के बीजों को रात को मिटटी के बर्तन में भिगो दें । सवेरे छानकर पीयें । आराम आएगा ।

नागफणी ; यह कांटेदार पौधा कब्ज़ में बहुत काम आता है । इसको तोड़ने पर जो दूध निकलता है ; उसकी 1-2 बूँद बताशे में रखकर खाएँ । ऊपर से पानी पी लें । परन्तु ध्यान रहे कि बहुत अधिक मात्रा में न लें। इसका दूध आँख में नहीं गिरना चाहिए . यह अंधापन ला सकता है । 

बबूल (कीकर) ;  अगर भूख कम लगती हो , indigestion हो तो इसकी फलियों का पाउडर प्रात: सायं लें । कब्ज़  होने पर कीकर की फली का पाउडर + मुलेठी + सूखा आंवला बराबर मात्रा में मिलकर रख लें । इसकी 5 ग्राम की मात्रा लेकर 200 ग्राम पानी में मंदी आँच पर पकाकर काढ़ा बनाएं और छान कर पी लें । ऐसा लगातार करने से indigestion , आँतों की समस्या , आँतों के घाव आदि सब ठीक हो जाते हैं ।
यह काढ़ा इतना प्रभावशाली है की इसे लेते रहने से बढ़ा हुआ बिलुरुबिन भी ठीक हो जाता है । SGOT  और SGPT का स्तर भी सामान्य हो जाता है ।
संग्रहणी , आँव या पेचिश की शिकायत हो तो कीकर की छाल + कुटज की छाल बराबर मात्रा  में मिलाकर ; उसकी 5 ग्राम की मात्रा लें । इसका काढ़ा बनाकर पीयें । इससे amoebisis भी ठीक होता है ।

करेला ;  भयानक कब्ज़ है और मल कठिनाई से निकल रहा हो तो करेले की सब्ज़ी का सेवन करें । सब्ज़ी में तेल अधिक न हो ।
छोटे बच्चों को पेट का अफ़ारा होने पर , करेले के पत्ते का एक बूँद रस बच्चे जीभ पर रख दें । अफ़ारा अपच आदि सब ठीक हो जाएगा । इतने छोटे बच्चे को भी यह दिया जा सकता है ; जो की अन्न भी न लेता हो !
पेट के कीड़े समाप्त करने हों तो करेले का रस या इसके पत्तों का रस 50 -100 मल तक सवेरे ले सकते हैं । यह  रस बहुत ज़्यादा नहीं लेना चाहिए । इससे दस्त लग सकते हैं । piles की बीमारी भी इस रस को लेने से ठीक हो जाती है ।

गंभारी ; acidity की समस्या हो तो गंभारी के 1 -2 फल  पानी पी लें । इसके फल को सुखाकर पाउडर बनाकर रख लें । यह मृदु विरेचक है । इसे लेने से दस्त नहीं लगते ; परन्तु सूखा मल निकल जाता है । आँतों के घाव भर जाते हैं , अल्सर आदि की समस्या ठीक हो जाती है । acidity होने पर यह पाउडर भी लिया जा सकता है ।

धनिया ; एक चम्मच धनिए का पाउडर ठन्डे पानी के साथ लेने से acidity ठीक हो जाती है ।

गाजर ;    पेट में अफ़ारा हो तो अजवायन ,जीरा और गाजर के बीज मिलाकर लिया जा  सकता  है ।

अमरुद  ;  अमरुद को संस्कृत भाषा में दृढबीजम कहा जाता है । इसके बीज कठोर होते हैं । उन्हें चबाना कठिन है ।  उन्हें चबाना ही नहीं चाहिए , बल्कि निगल लेना चाहिए । अमरुद के गूदे को चबाकर बीजों को ऐसे ही निगल लेना चाहिए । इस प्रकार से अमरूद को खाया जाए ,तो यह फल intestines के लिये सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । यह फल पेट के लिए लाभकारी और गुणकारी माना गया है । यह कब्ज़ को दूर करने वाला और मन को प्रसन्न रखने वाला फल है । मल को रेचन करने का गुण इसके बीजों में होता है ; बशर्ते कि उन्हें निगला जाए । अपचन होने पर इसकी छाल , पत्तियां और सौंठ मिलाकर काढ़ा बनाएँ और सवेरे शाम पीएँ । संग्रहणी या अतिसार की समस्या से भी यह काढ़ा मुक्ति दिलाता है । इसके ताज़े या सूखे पत्तों में तुलसी मिलाकर चाय भी बनाई जा सकती है । यह बहुत लाभप्रद होती है । छोटे बच्चों को colitis की समस्या हो तो इसकी जड़ का छिलका 2 ग्राम लेकर उसका काढ़ा बनाकर दे सकते हैं ।

गन्ना ;   जूट का ऐसी बोरी (बैग ) लें , जिसमे कि पिछले दो तीन साल पहले गुड का storage किया गया हो । इस बोरी को जलाकर राख कर लें । यह राख औषधि का कार्य करती है । इसकी 2-2 ग्राम  की मात्रा में लेने से दस्त लगे हों तो वे तुरंत बंद हो जाते है । दस्त होने पर गुड के साथ बेल का पावडर भी लिया जा सकता है ।

भुईं आँवला ;     पेट में दर्द हो और कारण न समझ आ रहा हो तो इसका काढ़ा ले लें ।  पेट दर्द तुरंत शांत हो जाएगा ।  ये digestive system को भी अच्छा करता है । आँतों का infection होने पर या ulcerative colitis होने पर इसके साथ साथ दूब घास को भी जड़ सहित उखाडकर, ताज़ा ताज़ा आधा कप रस लें ।  Bleeding 2-3 दिन में ही बंद हो जाएगी ।  

ककड़ी  ;      इसे मधुर रस से युक्त मन गया है ; अर्थात यह पित्त का शमन करती है ।  पाचन की कमी को ठीक कर देती है ।  acidity की समस्या को समाप्त कर देती है ।  पाचन ठीक से न हो रहा हो तो ककडी की सब्जी अवश्य खानी चाहिए .। इससे पेट की सभी समस्याएँ ठीक हो जाती हैं ।  1 ग्राम ककडी के बीजों के पावडर में 4 ग्राम मुलेठी का पावडर मिलाकर 500 ग्राम पानी मिलाकर रात को मिट्टी के बर्तन में भिगो दें ।  सवेरे इसका पानी छानकर पीने से acidity , पेट के अल्सर और infections ठीक हो जाते हैं।  


इलायची  ;    बेल का पावडर 10  ग्राम +1  ग्राम इलायची सुबह शाम लेने से पेट की सभी बीमारियों , जैसे colitis , गैस , अफारा आदि से छुटकारा मिलता है । 

रेवनचीनी (rhubarb )   ;     इसकी जड़ों की शुद्धता की परख कर लेनी चाहिए . इसकी जड़ें हल्की पीली और हल्की खुशबू वाली होती हैं . यह कब्ज़ को भी ठीक करता है . यह मृदु विरेचक है . रेवनचीनी +सौंफ + हरड+त्रिफला बराबर मात्रा  में लेकर सवेरे शाम दो दो ग्राम की मात्रा में सवेरे शाम लें . इससे पेट साफ़ तो होता ही है साथ ही आँतों में कम खुश्की होती है . आँतों के घाव भी भरते हैं . केवल रेवनचीनी की जड़ का पावडर दो तीन ग्राम की मात्रा में सवेरे शाम लेने से भी आंतें ठीक रहती हैं . इससे colitis भी ठीक होता है .
                    अगर acidity है तो धनिया +मिश्री मिलाकर सवेरे शाम गुनगुने पानी से ले लें . अगर दस्त लगे हों तब इसे नहीं लेना चाहिए । 
 संत महात्मा पेट के रोगों में इसकी जड़ों का बहुत प्रयोग करते हैं . वे इसकी जड़ के दो तीन टुकड़ों को दाल या सब्जी में उबाल लेते हैं . फिर उन जड़ों को चबा चबाकर खाते हैं ।  ये थोड़ी कसैली अवश्य लगती हैं ; परन्तु पेट के रोग , पेट के अल्सर , पेट के घाव और पेट के सभी संक्रमणों के लिए लाभकारी हैं ।  

कूठ (costus) ;   शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द हो , पेट में दर्द हो या किसी अन्य प्रकार का दर्द हो तो , हल्दी+मेथी +सौंठ +अश्वगंधा +कूठ को मिलाकर कुछ दिनों तक लें । 

चांगेरी (indian sorrel)  ;   आँतों में infection हो जाए , तो भी इसके पत्तों की चटनी लें या इसके पत्तों का रस ले लें ।  

अमलतास (purging cassia) ;   इसकी मोटी फलियों के बीच का गूदा मीठा होता है . यह कब्ज़ के लिए , पेट को ठीक रखने के लिए और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए अति उत्तम है . अगर पेट को और पाचन तंत्र को ठीक रखना है तो अमलतास की पकी फलियों का 15-20 ग्राम गूदा +8-10 मुनक्का रात को भिगोकर रखें . सुबह इसे मसलकर, छानकर , खाली पेट पीयें ।  यह इतना सौम्य और मृदु विरेचक है कि छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी सुरक्षित है ।  अगर 2-3 महीने के बच्चे के पेट में अफारा हो जाए तो , अमलतास के गूदे में थोडा हींग मिलाकर नाभि के आसपास लगा दें । 
                           आँतों में घाव , सूजन या संक्रमण हो , acidity की समस्या हो या ulcerative colitis की समस्या हो तो , इसके 15-20 ग्राम गूदे में , 1-2 ग्राम धनिया मिलाकर , रात को मिटटी के बर्तन में भिगो कर रख दें ।  सवेरे खाली पेट ऊपर का पानी निथारकर पी लें . धनिया अधिक न मिलाएं ।  इससे ठण्ड लग सकती है ।  सर्दी-जुकाम हो सकता है
 इसके फूलों का गुलकंद शीतल , सौम्य एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है ।  यह पेट के रोगों में लाभकारी होता है ।  इसके फूलों की चटनी और सब्जी पेट के रोगों को ठीक करती है । इसके फूलों को सुखाकर उनका पावडर करके , सवेरे शाम लिया जाए ,  तो पेट ठीक रहता है , पाचन ठीक रहता है ।

गंभारी (verbenaceae) ;   भयानक acidity में इसके दो फल खाकर पानी  पी लें । कहीं भी अल्सर हो गये हों तो , इसके सूखे फल का पावडर , सवेरे शाम पानी के साथ लें ।  इसका फल अपने आप में ही टानिक का कार्य करता है । आंव की बीमारी हो तो मुलेठी +गंभारी की छाल +गंभारी का फल ; इन सबका पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर एक एक चम्मच सवेरे शाम लें ।   
                                           आँतों में infections हों या अन्य कहीं पर भी infections होने पर इसके फल का पावडर सवेरे शाम लें . यह म्रदु विरेचक भी है . इसलिए इसको लेते रहने से constipation की समस्या भी नहीं होती . इसके पत्तों की चाय भी बहुत लाभदायक है | 

शिरीष  ;     दस्त लगने पर इसके बीजों का पावडर आधा ग्राम की मात्रा में लें ।

बबूल या कीकर  ;   Colitis या amoebisis होने पर कुटज +बबूल की छाल का काढ़ा लें ।

बहेड़ा (bellaric myrobalan) ;    इसके फल का अक्सर छिलका ही प्रयोग में लाया जाता है ।  आँतों में संक्रमण हो या acidity की समस्या हो ; इसे त्रिफला के रूप में लिया जा सकता है ।  यह निरापद है। 

लौकी( bottle gourd)  :   लौकी को घीया और दूधी भी कहा जाता है . ताज़ी लौकी का छिलका चमकदार होता है . इसे गरम पानी से अच्छी तरह धोकर इसका जूस निकालना चाहिए . इसके जूस में सेब का जूस मिला लें तो यह स्वादिष्ट हो जाता है . इसके जूस को सवेरे खाली पेट काली मिर्च मिलाकर और थोड़ा गुनगुना करके लेना चाहिए . इसका जूस acidity  को कम करता है और indigestion की समस्या को खत्म करता है . इसके जूस में तुलसी या पोदीना भी मिलाया जा सकता है . 
                   लौकी कडवी नहीं होनी चाहिए ;  इसका जूस हानिकारक  हो सकता है |  

अतीस या अतिविषा  ;     पेचिश , colitis संग्रहणी या अतिसार होने पर इसका पावडर दही या पानी के साथ लेना चाहिए . Irritable bowel syndrome होने पर , अतीस +बिल्वादी चूर्ण +अविपत्तिकर चूर्ण और मुक्ताशुक्ति भस्म बराबर मात्रा में मिलाकर 3-4 ग्राम की मात्रा में लेना चाहिए ।

ममीरा (gold thread cypress)  ;  आँतों में या पेट में infection हो तो इसकी जड़ कूटकर रस या काढ़ा लें |  

निर्गुण्डी (vitex negundo ) ;  अपच हो गया हो तो इसके पत्ते और अदरक उबालकर चाय की तरह पीयें ।  इससे अफारा भी ठीक होगा ।

दूधी , दूधिया घास (milk hedge)  ;   अगर शौच बार बार आ रहा हो या colitis की समस्या हो तो दूधी चबाएं या फिर इसका सूखा पावडर एक एक चम्मच सवेरे शाम लें ।  पेचिश हो तो ताज़ी दूधी पीसकर जरा सी फिटकरी मिलाकर लें । 

नागदोन  ;      कब्ज़ हो या पेट में अल्सर हों तो इसके दो पत्ते या उनका रस काली मिर्च के साथ खाली पेट लें । Amoebisis या colitis हो तो दूधी और इसके दो पत्ते लें ।  पेट में अफारा हो तो इसके दो पत्तों का शर्बत खाली पेट लें । 

तुम्बरू (toothache tree)  ;   Indigestion की समस्या रहती हो तो इसका मसाले की तरह प्रयोग करें । अगर पेट में कीड़े हों तो चटनी में तुम्बरू मिलाकर लें ।  इससे पाचन भी बढ़ेगा ।  

महानिम्ब, बकायन(bead tree)  ;   अगर constipation हो और piles की शिकायत हो तो इसके सूखे बीजों का 3 ग्राम पावडर खाली पेट ताज़े पानी या छाछ के साथ सवेरे शाम लें । 

धातकी (woodfordia)  ;  पेट के रोगों के लिए यह बहुत ही अच्छा है . थोड़ी सी कोमल पत्तियों को कूटकर  रस निकालकर दस्त या आंव होने पर ले सकते हैं । अतिसार में या अधिक मरोड़े और ऐंठन हो तो , इसके फूलों का 2 ग्राम पावडर प्रात: सायं छाछ के साथ ले लें । पेट के रोगों के लिए इसका प्रयोग अवश्य होता है |इसके फूल व् पत्तियों का काढ़ा लें , या केवल फूलों का शर्बत लें ।  इसके सूखे फूलों का पावडर भी लिया जा सकता है ।  इससे पेट के रोग ठीक होते हैं ।  यह पौष्टिक तो होता ही है ।

वासा (malabar nut) ;   आँतों के infection में इसमें बराबर मात्रा में मुलेठी मिलाकर एक एक चम्मच सवेरे शाम लें ।    

मुलेठी (licorice root)  ;  पेट में अल्सर या colitis होने पर इसके 5-7 ग्राम पावडर का काढ़ा लें।  पेट में दर्द ,ऐंठन या कब्ज़ हो या मल जमा हो गया हो तो , मुलेठी और त्रिफला पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच सवेरे शाम दूध या गर्म पानी के साथ लें ।  यह मधुर विरेचक (mild laxative) भी है ।  लेकिन पेट को नुकसान नहीं पहुँचाता ।   

पिप्पली (long pepper)  ;  पेट दर्द के लिए इसका एक ग्राम पावडर शहद के साथ चाटें ।  

तेजपत्ता (bay leaves)  ;  पेट में अफारा हो तो 5 ग्राम तेजपत्ता और अदरक का काढ़ा शहद मिलाकर लें ।  उबकाई आती हों तो इसकी 5 ग्राम पत्तियां उबालकर सवेरे शाम लें | अफारा या वायु गोला हो तो पत्ते उबालकर सेंधा नमक मिलाकर दें ।    

चित्रक (leadwort)  ;  पेट की बीमारी हो , पेट का अफारा हो या पेट फूलता हो तो , सवेरे खाली पेट इसकी जड़ का काढ़ा लें या पंचकोल (चित्रक , चव्य, पीपल ,पीपलामूल , सौंठ ) का काढ़ा लें । 

भृंगराज     ;    पेट दर्द या पेट में सूजन हो तो इसके पत्ते पीसकर लेप लगाएं और  इसके पत्तों का रस पिलायें । ताज़ा न मिले तो सूखे पत्तों का पावडर भी दिया जा सकता है । 

भारंगी (turk's turban moon)  ;   पेट का संक्रमण खत्म करना हो तो इसके पंचांग का या फिर पत्तियों का काढ़ा लें | कब्ज़ हो  या हिचकी आती हों ,तब भी इसके पंचांग का काढ़ा लिया जा सकता है |    इसके बीज का पावडर थोड़ी मात्रा में लेने से पेट दर्द व अन्य रोगों में लाभ होता है |     

बेल  ;      अगर पेट की समस्या , colitis है तो पका फल न लें . इसके लिए कच्चे फल का पावडर 1-1 चम्मच सवेरे शाम लें ।   बिल्वादी चूर्ण भी इसके कच्चे फल का चूर्ण है ।  अगर बार -बार शौच आता है तो यह चूर्ण लें ।  संग्रहणी की परेशानी है और bleeding भी हो रही है तो 100 ग्राम कच्चे फल के पावडर में 10 ग्राम सौंठ मिलाकर एक एक चम्मच सवेरे शाम लें ।

lemon grass  ;   पेट के रोग  का एक इलाज है lemon grass ।   इसके दो पत्ते लेकर अच्छी तरह रगडकर एक गिलास पानी में डालकर उबालें ।  फिर छानकर पीयें ।  बहुत भीनी भीनी सुगंध भी आएगी और रंग तो सुंदर लगेगा ही . चाहें तो इसमें थोड़ी सी चीनी मिला सकते हैं ।  इस चाय को बनाते समय इसमें  तुलसी के पत्ते भी ड़ाल दें ।  

शरपुंखा  ;    पेट दर्द या अफारा हो या फिर acidity की समस्या ;या फिर डकार आती हों । सब तरह की दिक्कत शरपुन्खा के पंचांग का काढ़ा ठीक कर देता है ।      
  गुलदाउदी ( chrysanthemum)  ;  पेट दर्द होने पर इसके फूलों का रस शहद या पानी के साथ लें ।    

मकोय (black nightshade)  ;     पेट खराब है , आँतों में infection है तो इस का इलाज है मकोय की सब्जी । रोज़ इसकी सब्जी खाएं । या फिर इसके 10 ग्राम पंचांग का काढ़ा पीयें ।    

 दूब ( grass )  ;  पेट में acidity हो या ulcer ; infections हों या colitis की समस्या  , सभी का समाधान है कि इसके पत्तों का  तीन चार चम्मच रस खाली पेट ले लें ।  आंव हों तो इस रस में थोड़ी सौंठ भी मिला लें । 
               

कुटज (इन्द्रजौ )  ;   पेट दर्द रहता हो और दस्त लगे हुए हों  तो इसकी छाल रात को मिट्टी के बर्तन में भिगोयें ।  इसका पानी  सवेरे सवेरे पी लें ।    amoebisis हो त सौंठ, हरड और कुटज की छाल बराबर मात्रा में मिलाकर सवेरे शाम लें । 
यह दस्तों में बड़ी कारगर दवाई है ।  दस्त लगने पर इसकी छाल का पावडर एक -एक ग्राम सवेरे शाम लें ।  या फिर कुटजघनवटी की एक एक गोली सवेरे शाम लें ।  बच्चे को इस गोली का छोटा सा टुकड़ा दें । 

गुड़हल, जबाकुसुम, (shoe flower, china rose) ; अल्सर या colitis होने पर इसकी चार -पांच पत्तियों को पीसकर शरबत बनाकर पीयें | acidity को भी यह दूर करता है ।  

तुलसी (holi basil)  ; पेट में infections हों तो इसमें अदरक , काली मिर्च, नमक और काली मिर्च मिलाकर चटनी बनायें और सेवन करें । 

मालती (rangoon creeper) ;  पेट दर्द में इसके फूल और पत्तियों का रस लेने से पाचक रस बनने लगते हैं ।  यह बच्चे भी आराम से ले सकते हैं । 

बथुआ (chenopodium )  ; आँतों में infections या सूजन हो तो इसका साग बहुत लाभकारी है ।  

सफ़ेद प्याज (white onion)  ;  पेट में दर्द हो तो इसके रस में हींग मिलाकर पेट पर लेप करें । इसके अलावा प्याज़ के रस में हींग और सेंधा नमक मिलाकर पी लें । अपच या कब्ज़ हो तो इसकी पत्तियों की चटनी खाएं । 

सेमल (silk cotton tree) ;  इसके फूल के डोडों की सब्जी खाने से आंव (colitis) की बीमारी ठीक होती है ।  

पीपल (sacred fig)  ; अगर ulcerative colitis हो , आँतों में सूजन या infections हों तो पीपल के पत्तों का रस लें । 

भुट्टा (corn)  ;  अगर दस्त लग गए हों तो इसके डंठल की राख ले लें ।  Colitis की समस्या हो तो इसके डंठल की 50 gm राख में 100 gm बेल का पावडर मिला कर एक-एक चम्मच लें ।  

घृतकुमारी (aloe vera)  ;  इसी से कुमारीआसव  बनाया जाता है ।  यह पेट के लिए लाभदायक है ।  ulcer या कब्ज़ होने पर इसके रस में एरंड का तेल डालकर ले लें । 

आँवला   ;   पेट में अल्सर या colitis की समस्या हो या फिर दस्त लगे हों , तो इसका रस या पावडर लाभ देता है ।  पेट साफ़ न हो रहा हो तो इसे नियमित रूप से लेना अच्छा रहता है ।  

करेला (bitter gourd)  ;  कब्ज़ के लिए करेले की सब्जी खाएं । 

अरण्ड (castor) ;  पेट  दर्द में  पानी  में 2 चम्मच  अरण्ड का तेल  और  नीम्बू लिया जा सकता है .पेट दर्द तो खत्म होगा ही ,  साथ ही यह आँतों  को शक्ति  भी देता है ।  दूध में मुनक्का उबालकर  और उसमें अरंडी का  तेल एक चम्मच डालकर सोने से पहले लिया जाये तो कब्ज़ भी नहीं रहता और आंतें भी मज़बूत होती हैं । 
                                     amoebisis  में भी इसके तेल का प्रतिदिन सेवन किया जाए तो लाभ होता है ।  appendix  की परेशानी हो या सूजन हो तो एक या दो चम्मच तेल रात को दूध में डालकर पीयें ।

 हल्दी (turmeric)  ;  कच्ची हल्दी पेट की बीमारी में लाभदायक है । 

मेथी (fenugreek) ;  पेट में संक्रमण हो तो मेथी और अजवायन को मिलाकर बनाया हुआ काढ़ा लिया जा सकता है । 

घृतकुमारी (aloe vera )  ;  यदि पेट में दर्द या अफारा हो तो इसका बीस ग्राम गूदा ले सकते हैं |  

पालक (spinach )  ;   आँतों में सूजन, अल्सर हो तो पालक नहीं लेना चाहिए । 

भाँग (cannabis )  ;  अगर colitis हो या amoebisis हो  तो कच्ची बेल का चूर्ण +सौंफ + भांग का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला लें ।  एक एक चम्मच सवेरे शाम लें ।  

अंजीर (fig)  ;  पाचन शक्ति कम हो गयी है ; तब भी यह भरपूर फायदा करता है ।  अगर constipation है तो इसे लेने से पेट साफ़ हो जाता है ।  

छुईमुई (touch me not)  ;   इसकी जड़ का गाढ़ा सा काढा बनाकर वैसलीन में मिला लें ।  anus बाहर आता है तो toilet के बाद इससे मालिश करें । समस्या ठीक हो जाएगी ।  
 यदि bleeding हो रही है दस्तों की,   तो इसकी 3-4 ग्राम जड़ पीसकर उसे दही में मिलाकर प्रात:काल ले लें ,या इसके पांच ग्राम पंचांग का काढ़ा पीएँ ।  

गिलोय  ;   इसे लेने से पेट की बीमारी , दस्त ,पेचिश,  आंव आदि ठीक होते हैं ।

हरसिंगार (night jasmine )  ;   इसकी दो पत्तियां +एक फूल +तुलसी के पत्ते   ये सब लेकर इसको एक गिलास पानी में उबालें और चाय की तरह पी लें ।  इससे पेट का जमा हुआ मल भी निकल जाएगा ।  

देसी गुलाब (rose)  ;      कब्ज़ है तो एक भाग त्रिफला और आधा भाग इस फूल का पावडर मिलाकर लें . 
      गुलकंद लेने से उदर रोग , अल्सर , acidity , कब्ज़ , infections ठीक रहते हैं ।  गुलकंद बनाने का तरीका आसान है . एक किलो देसी गुलाब की पंखुड़ियों में दो किलो चीनी मिलाकर अच्छी तरह रगड़ लें. इसे कांच के बर्तन में डालकर दो- चार दिन धूप दिखा दें . बस बन गया गुलकंद !
आँतों में घाव हो तो 100 ग्राम मुलेटी +50 ग्राम सौंफ +50 ग्राम गुलाब की पंखुडियाँ ; तीनों को मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा में लें ।  इसका 100 ग्राम पानी में काढ़ा बनाकर पीयें । 

curry leaves  ;    पेट दर्द या अफारा हो तो 2-3 ग्राम पत्तों का काढ़ा 400 ग्राम में पकाकर बनायें ।  अपच हो तो 1-2 ग्राम पत्तों को पानी उबालकर चाय की तरह पिएँ । 

अनार (pomegranate )  ;  अगर दस्त लगे हों तो इसके छिलके के पावडर में कच्ची बेल का पावडर मिलाकर सवेरे शाम ले लें ।

गूलर (cluster fig)  ;   Loose  motions की समस्या हो तो इसकी कोमल पत्तियों का 10-15 ग्राम रस लें ।  पेट में दर्द हो तो इसके फल का पावडर +अजवायन +सेंधा नमक मिलाकर लें ।  पेट के मरोड़े , दर्द , colitis ,infections या amoebisis की समस्या हो तो इसके फलों की सब्जी खाएं ।  

पलाश (flame of the forest)  ;  आंतें ठीक नहीं है , अल्सर हैं ,  तो इसके 5-10 फूल रात को आधा लिटर पानी में भिगोयें और सवेरे उस पानी को मसलकर , छानकर पीयें |  
अगर आधा किलो इसकी जड़ को आठ गुना पानी में उबालते हुए अर्क (distilled water) बनाया जाए तो यह अर्क  ulcerative colitis में बहुत लाभ करता है |        

 मरुआ  ;  इसके पत्तों को चाय में डालकर उबालकर पीयें तो पेट भी ठीक रहता है । अपच अफारा हो तो इसकी चटनी बहुत लाभकारी है । पेट दर्द हो तो इसकी चटनी खाएं , इसका काढ़ा पीयें या ऐसे ही चबाकर रस अंदर लेते रहें ।  

थूहर (milk bush)  ;   इसके दूध में छोटी हरड भिगोकर सुखा दें ।  इस सूखी हुई हरड को घिसकर थोडा सा रात को लिया जाए तो कब्ज़ दूर होता है और पुराने से पुराना मल निकल जाता है ।  

सहदेवी  ;  अगर आँतों में संक्रमण है , अल्सर है या फ़ूड poisoning हो गई है , तो 2 ग्राम सहदेवी और 2 ग्राम मुलेटी को मिलाकर लें ।  केवल मुलेटी भी पेट के अल्सर ठीक करती है । 

कालमेघ ;    इसके एक ग्राम पत्ते +एक -दो ग्राम भूमि आंवला +दो ग्राम मुलेटी का काढ़ा लें . इससे आँतों में चिपका हुआ पुराना मल भी निकल जाएगा .
                  अगर पेट में कीड़े हैं , भयानक पुराना कब्ज़ है , आँतों में infection है , indigestion है , भूख नहीं लगती ; सभी का इलाज है यह कि   2 ग्राम आंवला +2 ग्राम कालमेघ +2 ग्राम मुलेटी का 400 ग्राम पानी में काढ़ा बनाइए और सवेरे शाम लीजिए ।  
2-3 gram कालमेघ में थोडा आंवला मिलाकर रात को मिट्टी के बर्तन में भिगो दें ।  सवेरे मसलकर खाली पेट पी लें । इससे पेट साफ़ रहता है । 

कचनार  ;   दस्त या आंव हों तो इसकी छाल का 3-4 ग्राम पावडर पानी के साथ लें। 

ब्राह्मी  ;   पेट दर्द हो तो इसके तीन चार पत्तों की लुगदी पानी के साथ लें। 

जामुन  ;   पेट में आंव हों या दस्त लगे हों तो इसकी पत्तियां और छाल 3-4 ग्राम की मात्रा में पानी में उबालकर काढ़ा पीयें। 

गोखरू  ;  गोखरू का काढ़ा पाचन को अच्छा करता है।   

अर्जुन  ;      इसकी 10-15 ग्राम ताज़ी छाल 200-300 ग्राम पानी या दूध में उबालकर सवेरे शाम लेने से लाभ होता है।  ताज़ा न मिले तो इसकी छाल का 5 ग्राम पावडर डेढ़ गिलास पानी में पकाएं।  जब आधा गिलास रह जाए , तो पी लें।  amoebisis की परेशानी में यह काढ़ा लाभदायक है ।