Friday, October 2, 2026

निराले नन्हें मेहमान

 उड़ीसा के बालासोर जिले में कुछ लोग सवेरे घूमने के लिए निकले तो उन्होंने देखा कि वहां पेड़ों पर औरांगुटान लटक रहे थे। ये ओरांगुटान के नन्हें बच्चे थे। इन पांच बच्चों को पेड़ों पर लटकता और उछलता कूदता हुआ देखकर राह में चलते हुए यात्री बहुत प्रसन्न हो रहे थे। वे वह कुछ देर तक रुककर इनको देखते; फिर अपनी राह चल देते।

 लेकिन कुछ जानकार यात्रियों ने जब इन्हें देखा तो वे हैरान ही हो गए। उन्होंने कहा कि ये साधारण बंदर नहीं हैं। यह तो औरंगुटान के बच्चे हैं। हमारे देश में तो औरांगुटान होते ही नहीं! फिर यह पांच बच्चे कहां से आ गए? लगता है कि कोई रात में ही इन्हें यहां छोड़ गया है। मलेशिया और इंडोनेशिया में रहने वाले औरांगुटान भारत में तो जीवित भी शायद नहीं रह पाएंगे।

 किसी ने वन्य अधिकारियों को उनके बारे में सूचित कर दिया। वन्य अधिकारी थोड़ी देर में वहां पहुंच गए। उन्होंने पांचो नन्हें ओरांगुटान बच्चों को बड़ी सावधानीपूर्वक पकड़ लिया। इनमें तीन नर बच्चे और दो मादा बच्चे थे। वन्य अधिकारियों ने कहा कि लगता है कि कोई इन्हे मलेशिया या इंडोनेशिया जैसे देश से तस्करी करके इन्हें यहां लाया है। फिर पकड़े जाने के डर से इनका ही जंगलों में छोड़ दिया गया। ये बच्चे एक से डेढ़ साल के बीच में हैं। अगर इनकी तुरंत अच्छी देखरेख न की गई तो ये बच्चे शायद जीवित न बचें। 

उन बच्चों को तुरंत भुवनेश्वर के पास नंदनकानन नमक चिड़िया घर में ले जाया गया। वहां उन्हें संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया। वैसे तो नन्हें औरांगुटान अपनी मां का दूध पीकर प्रसन्न होते हैं।  लेकिन यहां इन्हें बोतल से दूध पिलाने का प्रयत्न किया गया। बच्चे बहुत अच्छे थे। तुरंत वातावरण में ढल गए। उन्होंने दूध भी पी लिया और मस्ती में खेलने भी लगे।

 वन अधिकारियों से पूछा गया कि बड़े होकर क्या ये नंदन कानन चिड़ियाघर का ही एक हिस्सा बन जाएंगे? तो उन्होंने बताया कि ये नन्हे मुन्ने अभी हमारे मेहमान हैं। जैसे ही उचित व्यवस्था होगी इन्हें उनके देश में वापस भेज दिया जाएगा। अगर इनका कोई अता-पता न लगा तो इन्हें इसी चिड़ियाघर में सुरक्षित रख लिया जाएगा।

 अभी तो निराले नन्हें मेहमान खूब खातिरदारी करवा रहे हैं। उन्हें किसी से मिलने भी नहीं दिया जाता। परंतु जब ये बड़े हो जाएंगे तो शायद ये इसी चिड़ियाघर की शोभा बढ़ाएंगे।